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शहरों की तरह गांवों में होगा कूड़ा उठान

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मऊ। पांच हजार से अधिक आबादी वाले 27 गांवों को स्वच्छता के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। आबादी से 200 मीटर की दूरी पर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया जाएगा। कूड़ा उठान के लिए नगर पालिका की तरह ग्राम पंचायत में भी वाहन खरीदें जाएंगे। जगह-जगह कूड़ेदान रखे जाएंगे। सफाई के साथ ठोस व गीले कचरे का प्रबंधन कर गांव को स्वच्छ बनाया जाएगा। विभाग की तरफ से कार्ययोजना तैयार की जा रही है।सरकार की तरफ से शहरों की तरह गांवों को स्वच्छ बनाने की कवायद तेज हो गई है। जिले के पांच हजार से अधिक आबादी वाले 27 गांवों को स्वच्छता के माडल के रूप में विकसित किया जाएगा।गांव को स्वच्छता के माडल के रूप में प्रस्तुत करने के लिए पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। ताकि कहीं भी गंदा पानी एकत्र न होने पाए। हैंडंपपों के पास सोख्ता पिट का निर्माण कराया जाएगा। साफसफाई के बाद निकलने वाले ठोस व गीले कचरे के निस्तारण के लिए गांव में कूड़ा प्रबंधन केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। जहां पर ठोस गीले व प्लास्टिक कचरे को अलग अलग कर निस्तारित किया जाएगा। प्लास्टिक कचरे को अलग कर ब्लाक मुख्यालय भेजा जाएगा। वहां से वह जिले पर जाएगा। इसके बाद नामित कंपनी को प्लास्टिक कचरा भेजा जाएगा। कंपनी की ओर से प्लास्टिक को गलाकर सड़क निर्माण में प्रयोग किया जाएगा। कूडे का घर-घर उठान करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए ग्रामीणों से कुछ शुल्क भी लिया जाएगा। साथ ही ठोस व गीले कचरे को जो निस्तारण योग्य होगा उसे निस्तारित कर दिया जाएगा। और कचरे को वर्मी कंपोस्ट के रूप में तैयार किया जाएगा। कंपोस्ट को ग्राम पंचायत की ओर से उसी गांव के किसानों को बेचा भी जाएगा। इससे गांव को राजस्व भी हासिल होगा।
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कोट
जिले के पांच हजार से अधिक आबादी वाले 27 गांवों को स्वच्छता के माडल के रूप में विकसित करने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। शीघ्र ही शासन को भेजा जाएगा। -अभिषेक शुक्ल, डीपीआरओ
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