मऊ। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट राजवीर सिंह ने नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में नामजद तीन आरोपियों को सुनवाई के बाद दोषी पाया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 40-40 हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर चार-चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड जमा होने पर 15 हजार रुपये पीडि़ता को देने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार वादिनी मुकदमा की तहरीर पर दक्षिणटोला थाने में एफआईआर दर्ज हुई। वादिनी का कथन है कि वह 20 जून 2018 को वह मायके चली गई थी। इस दौरान 12 व 8 वर्षीय दो नाबालिग लड़कियों को अपने आवास पर छोड़ गई थी। 20 जून 2018 की रात्रि में आरोपीगण ने उसके घर में घुसकर उसकी छोटी लड़की को भगा दिया। बड़ी लड़की के साथ छेड़छाड़ की। उसके साथ तीन लोगों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया।
पुलिस ने वादिनी की तहरीर के आधार पर दक्षिणटोला थाना क्षेत्र के प्रेमनगर चकिया कांशीराम आवास निवासी अयूब पुत्र खुर्शीद, कल्लू उर्फ आरिफ पुत्र इसराइल और तस्लीम पुत्र नाजिम के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विमल श्रीवास्तव, प्रवीण मिश्रा और रामचंद्र चौहान ने कुल 7 गवाहों को पेश किया। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद तीनों को सामूहिक दुष्कर्म करने और धमकी देने के मामले में दोषी पाया।