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एसटीपी के लिए तलाशी जा रही जमीन

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मऊ। तमसा नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। लेकिन अभी तक उसे एसटीपी निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल सकी है। इसके लिए गठित तीन सदस्यीय टीम जमीन तलाशने में जुटी हुई है। जमीन मिलती है तो एसटीपी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। फिलहाल नदी में गिर रहे गंदे नाले के पानी का ट्रीटमेंट अस्थायी रुप से बायो रेमिडेशन पद्धति से कराया जा रहा है। पालिका क्षेत्र के 42 वार्डो से निकलने वाले 17 नालों से रोजाना हजारों गैलन लीटर गंदा पानी नदी में गिर रहा है। इस पानी को अस्थायी रुप से बायो रेमिडेशन पद्धति से साफ किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे में नदी के पानी की क्वालिटी में सुधार हो रहा है। लेकिन पूरी तरह से नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण जरूरी है। सूत्रों की मानें तो जलनिगम द्वारा एसटीपी का प्रस्ताव 2019 में ही बना कर नगर पालिका को सौंप जा चुका है। लेकिन जमीन न मिलने के चलते प्रोजेक्ट अधर में है। एसटीपी के लिए पांच एकड़ जमीन नगर क्षेत्र के आसपास एरिया में तलाशी जा रही है। पालिका सूत्रों के अनुसार जमीन तलाशने के साथ ही पालिका अपनी जमीन पर भी नजर रखे है। यदि कहीं सरकारी जमीन निगाह में आती है तो उस पर विचार किया जाएगा। टीम को भी हिदायत दी गई है कि वह जमीन की तलाश के दौरान सरकारी जमीन पर भी निगाह रखे। अधिकारियों की मानें तो एसटीपी बनने से न केवल तमसा नदी निर्मल होगी, बल्कि इससे गिरते भूगर्भ जलस्तर में स्थिरता आने के साथ व्यर्थ बहने वाले गंदे पानी का सदुपयोग भी हो सकेगा। अधिशासी अधिकारी नगरपालिका दिनेश कुमार ने बताया कि एसटीपी के लिए जमीन तलाशी जा रही है। सरकारी जमीन पर भी नजर है। जमीन मिलती है तो एसटीपी का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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