राशन कार्डों का सत्यापन किया जा रहा है। सभी सदस्यों की ई-केवाईसी की जिम्मेदारी कोटेदारों को सौंपी गई है। यह काम बिना किसी शुल्क के किया जाना है लेकिन कोटेदार ई-केवाईसी करने के लिए प्रति यूनिट पर 10 रुपये वसूल रहे हैं।
कोटेदारों को ई-पॉश मशीनों से लाभार्थियों का अंगूठा लगाकर ई-केवाईसी करना है। शुल्क लेने पर कोटेदारों और लाभार्थियों के बीच कहासुनी हो रही है। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से शुल्क लेने का कोई आदेश नहीं है। कोटेदारों का कहना है कि जनसेवा केंद्र पर ई-केवाईसी कराने पर 50 रुपये शुल्क लगता है। वे तो महज 10 रुपये ही शुल्क ले रहे हैं।
जिले के नौ ब्लॉकों, मऊ नगर पालिका और 11 नगर पंचायतों में 384091 राशन कार्ड हैं। इन पर 16 लाख 67 हजार 720 लाभार्थियों को राशन दिया जाता है। हर एक की केवाईसी करनी है। अब तक 34.75 प्रतिशत ( 579546) लाभार्थियों की ई-केवाईसी हो चुकी है। एक लाभार्थी से 10 रुपये के हिसाब से अब तक 1027 कोटेदारों ने 57 लाख 95 हजार 460 रुपये की वसूली की है। जून के पहले सप्ताह से ही कोटेदारों द्वारा ई-केवाईसी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक इसके लिए अंतिम तिथि निर्धारित नहीं हुई है। यदि शुल्क वसूली का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो 16 लाख 67 हजार 720 लाभार्थियों से एक करोड़ 66 लाख 77 हजार 200 शुल्क की वसूली हो जाएगी।
ई-केवाईसी सेलाभ
राशन कार्ड की ई-केवाईसी से सरकार को सुचारु रूप से खाद्यान्न वितरण करने और पात्र व्यक्तियों की पहचान होगी। तमाम अपात्र लोग भी राशन कार्ड खाद्यान्न योजना का लाभ उठा रहे हैं, ई-केवाईसी के बाद उनका नाम काटा जा सकेगा। साथ ही सरकार के पास राशन कार्ड धारक के परिवार की संख्या का अद्यतन विवरण उपलब्ध होगा।
केस-1
कोपागंज ब्लॉक क्षेत्र के धवरियासाथ गांव के चार राशन कार्ड धारकों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि उनके गांव में कोटे की दो दुकान हैं, जहां ई-केवाईसी के लिए एक यूनिट पर 10 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। इस बात का विरोध करने पर कोटेदार का कहना है कि सरकार के नियम के मुताबिक वे शुल्क ले रहे हैं।
केस-2
इसी तरह फैजुल्लाहपुर और काछीकला गांव के कुछ कार्ड धारकों ने नाम न लिखने की शर्त पर शुल्क लेने की बात बताई। यही नहीं उन्होंने बताया कि आसपास के सभी गांवों में शुल्क लिया जा रहा है। बताया कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने पर उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है।