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मातृ भक्तों ने निकाली कलश यात्रा

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दोहरीघाट में नौ दिवसीय त्रिदेव सद्गगुरु महाशक्ति अखण्ड महायज्ञ के शुभारंभ पर मातेश्वरी परिवार ? - फोटो : MAU
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दोहरीघाट। कस्बा स्थित सरयू नदी के किनारे बसे अंतराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में आयोजित नौ दिवसीय त्रिदेव सद्गुगुरु महाशक्ति अखंड महायज्ञ के क्रम में शुक्रवार को मातृ भक्तों ने गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा जुलूस निकाला। कलश यात्रा में जयकारे से वातावरण गूंज उठा। सदगुरु महाराज के नेतृत्व में त्रिदेव सदगुरु महाशक्ति अखंड महायज्ञ का शुभारंभ 101 शंखों के शंखनाद से शुरु किया गया। कलश यात्रा मातेश्वरी महाधाम से शुरू होकर पूरे नगर का भ्रमण करते हुए समीपवर्ती जनपद गोरखपुर के शक्तिपीठों से होते हुए मुक्तिपथ पहुंचा। पतित पावनी सरयू से मातृभक्तो ने अपने कलश में जल भर कर वापस मातेश्वरी महाधाम में आकर अपने अपने हवन कुंड पर कलश स्थापना कर पूरे विधि विधान के साथ नौ दिवसीय त्रिदेव सद्गगुरु महाशक्ति अखंड महायज्ञ का शुभारंभ किया। कलश यात्रा जुलूस नगर से होते हुए करीब पांच किमी क्षेत्र का भ्रमण किया। जुलूस में भगवान शिव, विष्णु, महिषामर्दनी सहित विभिन्न देवी देवताओं की दर्जनों झांकियां ऊंट, हाथी, घोड़े गाजे बाजे के साथ मातृभक्त सदगुरू महाराज की जय जयकार करते हुए चलरहे थे। कलश यात्रा में मातृभक्तो के जनसैलाब को लेकर यातायात व्यवस्था रुट डायवर्जन को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रही। मातेश्वरी धाम से लेकर गोरखपुर मऊ पुल पर अपने जनपद की सीमा तक सड़क किनारे पुलिस चक्रमण करती रही। कलश यात्रा के समय छोटे बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया गया। कलश यात्रा के बाद आवागमन शुरू किया जा सका। इस मौके पर सद्गुरु महाराज ने कहा कि आज के परिवेश में मानव अपनी धर्म की मूल उद्देश्यों को भूल कर चंद लोगों के बहकावे में आकर भाई भाई का दुश्मन बन बैठा है। धर्म की गलत परिभाषा व गलत उद्देश्यो को अपनाने लगा है। जबकि यह सत्य नहीं है। कोई भी धर्म भाई को भाई से नफरत व ईष्या नही सिखाता है। जब कि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानव में आपसी समरसता व भेदभाव से इतर प्रेम करने की सीख देता है।
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