फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में साक्षरता दर शत प्रतिशत नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। दशकों बाद भी जिले में शत प्रतिशत साक्षरता दर हासिल नहीं हो सकी है। जिले में निरक्षरता दूर करने के लिए सरकार की तरफ सेे कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई गई। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये भी खर्च किया गया। इसके बाद भी जिले में अभी तक साक्षरता दर 73.09 फीसदी के करीब है। जबकि पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा निरक्षर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आठ लाख 42 हजार 924 लोग निरक्षर हैं। साक्षरता दर बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की गई। सर्वशिक्षा अभियान भी इसी का एक हिस्सा है। इन अभियानों पर लाखों रुपये खर्च भी किए गए लेकिन साक्षरता की दर बढ़ने की रफ्तार बहुत धीमी है। जिले में 13 लाख 63 हजार 44 लोग साक्षर हैं। जबकि निरक्षरों की संख्या आठ लाख 42 हजार 924 है। पुरुष साक्षरता दर 82.45 प्रतिशत तथा महिलाओं की साक्षरता दर 63.63 प्रतिशत है। सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. विनोद तिवारी का कहना है कि साक्षरता दर को बढ़ाने के साथ-साथ संस्कारपरक शिक्षा दी जानी चाहिए। पढ़ाई को रोजगार परक करना होगा। पृथ्वीराज चौहान महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सिंह का कहना है कि साक्षरता दर को बढ़ाने लिए जिम्मेदारी अभिभावकों को उठानी होगी। वे हर हाल में बच्चों का स्कूल में दाखिला कराएं। अध्यापकों को भी यह जिम्मेदारी उठानी होगी। कोई बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे इसका ध्यान रखें। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ददन राम ने बताया कि साक्षरता और निरक्षरता के जो आंकड़े हैं वह 2011 की जनगणना के अनुसार हैं। अभी नई जनगणना नहीं हुई है जिसके कारण साक्षरता और निरक्षरता का नया आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें