मऊ। जल जीवन मिशन योजना के तहत जिले के विभिन्न गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मार्च 2024 समय सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन चार तहसीलों के 16 ग्राम पंचायतों में जमीन विवाद के चलते अभी तक कार्य भी शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का मामला अधर में लटका है। प्रशासन युद्धस्तर पर इन गांवों का विवाद सुलझाने में जुटा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि 16 की जगह 10 गांवों के जमीन विवाद का मामला सुलझा लिया गया है।
जनपद की 658 ग्रामसभाओं में आबादी 24 लाख के करीब है। केंद्र की ओर से वर्ष 2019 में हर ग्रामीण को घर में नल का जल उपलब्ध कराने के लिए योजना शुरू की गई। इसकी समय सीमा मार्च 2024 तक करनी है। 532 परियोजना की तुलना में 516 डीपीआर पर कार्य चल रहा है। लगभग 12 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। घोसी तहसील में सोमराडीह, दौलतपुर, इब्राहिमाबाद प्रथम, फरसराखुर्द गांव में जमीन नहीं मिली है। मधुबन तहसील के मोलनापुर में भूमि विवाद है। यहां मेसर्स एलसी इंफ्रा मेसर्स अहमदाबाद को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोहम्मदाबाद गोहना के सियाबस्ती, तुलसीपुर कुढ़वा, खैराबाद व हाजीपुर में भी भूमि उपलब्ध नहीं है। यहां मेसर्स केएलएएसआर हैदराबाद को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी प्रकार सदर तहसील की शहरोज, भवनाथपुर में मेसर्स जीए इंफ्रा राजस्थान, उमरपुर केएसएलआर, गुलौरी, ढेकवारा व सिधवल एलसी इंफ्रा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहां भी योजना के लिए जमीन नहीं मिली है।
कंपनी डीपीआर राजस्व गांव शुरू कार्य पूर्ण परियोजना
एलसी इंफ्रा मेसर्स 219 486 215 04
जीए इंफ्रा 200 513 513 06
केएसएलआर 113 319 307 02
पूरी हो चुकी पानी की टंकी
जीए इंफ्रा ने छह गांवों में सीधे पंप से पानी भेज रही है। केएसएलआर तीन गांवों में पंप से पानी दे रही है। इसके अलावा एलसी इंफ्रा ने चार टंकी व जीए इंफा ने तीन टंकियों का निर्माण पूरा कर लिया गया है।