मऊ। संक्रमण की पहली लहर में संक्रमितों के लिए अस्पतालों में कम जगह को देखते हुए लाखों की लागत से तैयार 12 कोच वाली आईसोलेशन ट्रेन के कोच धूल फांक रहे हैं। करीब डेढ़ वर्ष से अधिक समय से कोचों के न ताले खुले न सीटों पर जमा धूल ही साफ की गईं। यह ट्रेन वर्तमान में मऊ जंक्शन से पांच किमी दूर पिपरीडीह रेलवे स्टेशन पर खड़ी है। आरपीएफ को इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। संक्रमण की पहली लहर में अस्पतालों में बेडों की संख्या कम होते देखकर रेलवे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए सभी डिवीजनों को आइसोलेशन कोच तैयार कराने की जिम्मेदारी दी थी ताकि आपात स्थिति में जिला प्रशासन को इसे उपलब्ध कराया जा सके। जिले में भी कैरेज एंड वैगन (सीएंडडब्ल्यू) विभाग ने ट्रेनों के पुराने कोचों से आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। इनमें ड्रिप चढ़ाने, ऑक्सीजन सिलिंडर रखने के साथ ही डस्टबिन की व्यवस्था थी। नर्सिंग स्टाफ के लिए भी कक्ष बनाया गया था। रेलवे सूत्रों की माने तो एक कोच को तैयार करने में दो से तीन लाख रुपये का खर्च आया था। इतना ही नहीं रेलवे की इस सकारात्मक पहल का सबसे पहले उपयोग मऊ जिला ने ही जून 2020 में किया था। जब इस कोच में मरीजों को रखा गया था। आईसोलेशन कोच का प्रयोग करने वाला जिला पूरे देश में पहले नंबर पर था। लेकिन इसके बाद संक्रमण की पहली लहर खत्म हुइ तो इन कोचों की भूमिका कम होती गई। हालांकि दूसरी में लहर जब आक्सीजन की कमी से लगातार मौतें हो रही थी, उस समय भी इस ट्रेन का प्रयोग नहीं किया गया। संक्रमण के दौरान 12 आईसोलेशन कोच वाली विशेष ट्रेन मऊ जंक्शन पहुंची थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी तथा तत्कालीन सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह की निर्देश पर जून 2020 में इन कोचों में मरीजों को भर्ती कराया गया था। इससे पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल का मऊ देश का पहला रेलवे स्टेशन बन गया, जहां पर कोविड केयर सेंटर के रूप में परिवर्तित कोच में 59 संदिग्ध मरीजों को रखा गया था। कोच की संरचना में 10 कोच-कोविड केयर सेंटर, एक एसी कोच एवं एक एसएलआर लगाया गया था। एक कोच में मरीजों के लिए आठ केबिन बनाए गए थे। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि संक्रमण में पुराने कोचों से आईसोलेशन रैक बनाया गया था। दो वर्षो से इसका प्रयोग नहीं हो रहा है। इनका प्रयोग न होने से रेलवे को कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। कोचों के दुबारा प्रयोग किए जाने की बात है तो यह निर्णय आला अधिकारियों के निर्देश पर होगा।