मऊ / मधुबन। विकासखंड फतहपुर मंडाव स्थित खीरी कोठा के देसी प्रजाति के बैंगन को जीआई टैग दिलाने का प्रयास शुरू हो गया है। इसके लिए डीएम अरुण कुमार ने उपनिदेशक कृषि एसपी श्रीवास्तव को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है । डीएम शनिवार को बैंगन की खेती का निरीक्षण करने खीरी कोठा पहुुंचे थे।
उपनिदेशक कृषि एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि यहां बैंगन को स्थानीय भाषा में लवकिहवा भंटा भी कहा जाता है। इसकी खेती से प्रति एकड़ एक लाख तक की शुद्ध आमदनी किसानों द्वारा प्राप्त की जाती है। इस देसी प्रजाति के बैंगन की लंबाई 10 से 15 इंच एवं मोटाई 7 से 9 इंच के बीच होती है। एक बैगन 500 ग्राम से 700 ग्राम तक का होता है। इस बैगन के उत्पादन में प्रति एकड़ 25 से 30 हजार का खर्च आता है। अपनी विशिष्ट पहचान के चलते मधुबन तहसील के कई इलाकों में इस देसी बैंगन का उत्पादन किया जाता है।
जिलाधिकारी अरुण कुमार ने इसके उत्पादन करने वाले किसानों को एफपीओ से जोड़कर एफपीओ के माध्यम से जीआई टैगिंग के लिए समस्त आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है उपनिदेशक कृषि को दिया। उन्होंने एफपीओ को निर्यात का लाइसेंस दिला कर क्षेत्र में उत्पादित इस देसी प्रजाति के बैगन को देश के अन्य हिस्सों में भेजने तथा क्षेत्र एवं किसानों की विशेष पहचान दिलाने के प्रयास करने को भी कहा। जिलाधिकारी ने किसान शिवदत्त पांडेय से भी इस देसी प्रजाति के बैंगन के उत्पादन के बारे में जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार आदि उपस्थित थे।