मऊ। महंगाई की मार से आम आदमी की थाली से पोषण दूर होता जा रहा है। दाल और सब्जी सहित सभी खाद्य वस्तुओं के दाम में काफी उछाल आया है। अब लोगों के लिए दो जून की रोटी जुटाने में परेशानी हो रही है। स्वास्थ्य के जानकार बताते रहे हैं कि स्वस्थ होने के लिए पौष्टिक आहार जरूरी है। लेकिन महंगाई के कारण यही आहार थाली से दूर हो रही है। बात हरी सब्जी की करें तो कोई भी सब्जी 50 रुपये प्रतिकिलो से कम नहीं है। दाल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। सामान्य आमदनी वालों को घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
शरीर को पौष्टिक तत्व देने वाली सब्जियां आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। पौष्टिक तत्व मिलने वाली सब्जियों के दाम में उछाल से यह आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही है। इससे शरीर में फाइबर आयरन मिनरल्स कैल्शियम प्रोटीन की मात्रा घट रही है। यह पोषक तत्व शरीर को मुहैया कराने वाले न तो सब्जियों के दाम कम हो रहे हैं और न ही दालों के। ज्यादातर सब्जियों के साथ खाए जाने वाले आलू की कीमत बाजार में 20 रुपये प्रति किलो है। महंगाई का दूसरा पहलू यह है कि इन सभी का उत्पादन करने वाले किसान को इन सभी का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। गेंहू की कटाई के बाद उसका सरकारी दर 22.50 रुपया है, जबकि आटा बाजार में 35 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। आम लोगों का कहना है कि दो जून की रोटी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। भरपेट भोजन मिल जाए वही प्रमुख बात है, पौष्टिक आहार तो सपना बन चुका है।
खाद्य पदार्थ कीमतें
अरहर दाल - 160 रुपया प्रतिकिलो
चना दाल - 80 रुपया प्रतिकिलो
मटर - 60 रुपया प्रतिकिलो
साबूत उड़द - 140 रुपया प्रतिकिलो
मूंग दाल - 160 रुपया प्रतिकिलो
सिंघाड़े का आटा - 250 रुपया प्रतिकिलो
मूंगफली - 120 रुपया प्रतिकिलो
आटा - 35 रुपया प्रतिकिलो
सरसों तेल - 130 रुपया प्रति लीटर
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सब्जी कीमतें
भिंडी - 60 रुपया प्रतिकिलो
करेला - 60 रुपया प्रतिकिलो
लौकी - 30 रुपया प्रतिकिलो
बोड़ा- 60 रुपया प्रतिकिलो
नेनुआ - 60 रुपया प्रतिकिलो
खीरा - 30 रुपया प्रतिकिलो
गाजर - 30 रुपया प्रतिकिलो
हरी मिर्च - 100 रुपया प्रतिकिलो
पालक - 40 रुपया प्रतिकिलो
मेथी - 50 रुपया प्रतिकिलो
लहसून - 200 रुपया प्रतिकिलो