नगर के पुरानी तहसील स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में दवा लेने पहुंचे लोगों की चेकअप करते चिक?
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मऊ। प्राचीन आयुर्वेद विधा की उपयोगिता एक बार फिर कोरोना संक्रमण काल में मुफीद साबित हो रही है। यही वजह है कि जिले के 29 आयुर्वेद अस्पतालों मेे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। नगर के पुरानी तहसील स्थित आयुर्वेद अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि आयुर्वेद ने कोरोना से जंग में अपनी उपयोगिता साबित की है। संक्रमण की घातकता कम होने का कारण आयुर्वेदिक काढ़े व उसके अन्य नुस्खों को भी माना जा रहा है। संक्रमण काल में लोगों में आयुर्वेद को लेकर काफी विश्वास बढ़ा है। पहले अस्पताल में प्रतिदिन की ओपीडी मुश्किल से 20 से 25 तक होती थी, लेकिन यह अब दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि संक्रमण के रोकथाम में आयुर्वेद को लेकर लोगों में विश्वास बढ़ा। आयुर्वेद अस्पतालों में प्रतिदिन तीन हजार तक मरीज उपचार कराने पहुंच रहे है। पहले से यह संख्या करीब 40 फीसदी तक ज्यादा है। बताया कि आयुर्वेदिक जीवनशैली व उपायों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत हो सकती है कि कई प्रकार के वायरल संक्रमण या तो होंगे नहीं और हुए तो बहुत गंभीर लक्षण नहीं उभरेंगे। एलोपैथ जहां त्वरित आराम देने के साथ कई तरह के दुष्प्रभाव छोड़ जाता है वहीं आयुर्वेद रोग को जड़ से समाप्त करता है। इसकी दवाओं से साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। हाल के दिनों में च्यवनप्राश, रत्नप्राश जैसे रसों, अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी अर्क आदि की मांग बढ़ी है। आजकल पेट रोग के मरीज बड़ी संख्या में आयुर्वेद को अपना रहे हैं।