मऊ। वैज्ञानिकों की टीम ने शनिवार को किसानों के खेतों को भ्रमण कर उन्हें जायद में खाली खेत का उपयोग कर आमदनी बढ़ाने के उपाय के साथ ही आधुनिक खेती के गुर भी सिखाए। कहा कि ऐसा कर वह बेहतर फसल उगा सकते हैं। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एलसी वर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम फसलों का जायजा लेने के लिए किसानों के प्रक्षेत्र पर भ्रमण कर रही है। टीम ने प्रगतिशील किसान रामू मौर्या ग्राम बस्ती बहरवार क्षेत्र का भ्रमण किया एवं किसान गोष्ठी के जरिए जायद की फसल की कटाइ, मड़ाई एवं भंडारण के साथ खरीफ की फसल की योजना बनाकर खेती करने की सलाह दी। प्रगतिशील किसानों ने बताया कि इस योजना से किसानों में दलहन उत्पादन एवं इसके क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी हुई है। केंद्र के पौध सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. लाल पंकज सिंह ने बताया कि उड़द एवं मूंग की खड़ी फसल से फलियों की तोड़ाई कर फसल अवशेष को हरी खाद के रूप में हैरो से जुताई कर खेत में मिला दें। जिससे जीवाश्म की मात्रा खेत में बढ़ जाएगी। वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद ने बताया कि दलहनी फसल की कटाई में यदि देरी होती है तो किसान डीएसआर (डाइरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक का प्रयोग कर धान की सीधी बुवाई कर सकते हैं। जिससे समय की बचत होगी और नर्सरी भी नहीं डालना पड़ेगा। मृदा वैज्ञानिक डॉ चंदन सिंह ने बताया कि खरीफ की फसल की बुवाई करने से पूर्व मृदा की जांच कराना जरूरी है। फसल में रासायनिक उर्वरकों को संतुलित रूप में ही डालें जिससे फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा और भूमि की उर्वरा शक्ति भी कायम रहेगी। बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डॉ हिमांशु राय ने बताया कि किसानों को अपनी फसल का बीज उत्पादन खुद करना चाहिए उसके लिए समय-समय पर कृषि विज्ञान केंद्र प्रशिक्षण देता रहता है।