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जिले में बालिका जन्मदर में बढ़ोत्तरी

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मऊ। जिले में पहले जहां बालकों की तुलना में बालिकाओं के जन्म का प्रतिशत कम रहता था। वहीं अब यह प्रतिशत बढ़ने लगा है। इसके पीछे लोगों में जनसंख्या स्थिरीकरण और फैमिली प्लानिंग को लेकर जागरुकता आई है। कन्या भ्रूण हत्या रोकने किए जा रहे प्रयासों का भी असर दिख रहा है। ऐसे में बालक और बालिकाओं के लिंग अनुपात के बीच का अंतर घटा है। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे 2020-21 के अनुसार लिंगानुपात 938 है। इसके पूर्व लिंगानुपात 870 रहा। ऐसे में बालिकाओं के जन्म में बढ़ोत्तरी हुई है। जिले में लिंगानुपात का स्तर बढ़ने लगा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट 2020-21 के अनुसार जिले में एक हजार पुरुषों पर 938 महिलाओं का अनुपात है। जबकि एनएफएच सर्वे वर्ष 2015-16 में एक हजार पुरुषों पर 870 महिलाओं का अनुपात था। जागरूकता अभियान व स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के चलते लिंगानुपात में सुधार देखने को मिल रहा है। भले ही यह संख्या अभी कम है लेकिन बालिका जन्मदर में वृद्धि हुई है। जो कि पहले काफी कम रहती थी। सरकार की तरफ से चलाए जा रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का असर लोगों पर हो रहा है। लोगों में बेटी की चाह बढ़ी है। जिला कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि 2020-21 में लिंगानुपात 938 है। जबकि इसके पूर्व लिंगानुपात 870 था। बालिका जन्म के मामले में अच्छी स्थिति है। बालक बालिकाओं के जन्म में पहले अंतर ज्यादा था। यह लोगों की अच्छी सोच और समाज में जागरुकता को दर्शाता है।
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