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कोविडकाल में एमडीएम के खाद्यान्न और कनवर्जन कास्ट का देना होगा हिसाब

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मऊ। जिले के परिषदीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों में कोविड काल के दौरान अभिभावकों को वितरित किए गए मिड डे मील के खाद्यान्न और कनवर्जन कास्ट का हिसाब देना होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों से 20 अक्तूबर तक रिपोर्ट मांगी है। जिले के 1465 सरकारी स्कूलों में 1.93 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। इन्हें कुपोषण से बचाने के लिए मिड-डे-मील योजना बनाई गई है। कोविड काल में विद्यालय बंद थे। ऐसे में मिड डे मील की जगह बच्चों के अभिभावकों को उसका खाद्यान्न और कनवर्जन कास्ट दिया गया था। इसकी पर्ची विद्यालयों के शिक्षकों ने काटी थी, जिसे कोटे के राशन की दुकानों पर जमा कराकर अभिभावकों ने राशन लिया था। जबकि कनवर्जन कास्ट विद्यालयों से एमडीएम खाते से अभिभावकों के खाते में स्थानांतरित की गई थी। 2021 में प्राथमिक विद्यालयों में 94 दिन का 9. 400 किलोग्राम प्रति छात्र खाद्यान्न दिया गया। जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 87 दिनों का 13.5 किलोग्राम था। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालयों में 636 रुपये प्रति छात्र, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 901 रुपये प्रति छात्र लागत राशि खाते में कनवर्जन कास्ट के रूप जमा कराई गई थी। खंड शिक्षा अधिकारी यह ब्योरा जुटाने में लगे हैं कि उनके क्षेत्र के विद्यालयों के कितने बच्चों के अभिभावकों को राशन वितरित किया गया और कितनों के खातों में कनवर्जन कास्ट जमा कराई गई। प्रधानाध्यापक भी इसका बहीखाता बनाने में जुटे हैं। जिला समन्वयक (एमडीएम) पीयूष गोयल ने बताया कि परिषदीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को कोविड काल में बच्चों के अभिभावकों को वितरित किए गए मिड डे मील के खाद्यान्न और कनवर्जन कास्ट का ब्यौरा देने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया गया है। 20 अक्तूबर तक इन्हें रिपोर्ट देनी होगी।
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