विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट राजवीर सिंह ने हत्या का प्रयास, गाली, धमकी और नाबालिग के साथ छेड़छाड़ के मामले में पति और पत्नी को हत्या का प्रयास और धमकी देने का दोषी पाया। वहीं एक पुत्र को नाबालिग के साथ छेड़छाड़ के मामले में दोषी पाया। विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा कि दोषी भानू सोनकर ने दोषी अशर्फी देवी के उकसाने पर एक साधु शांत और सहनशीलता उदारता की प्रतिमूर्ति होने के बावजूद पीडि़ता की मां को जमीन पर पटककर जान से मारने की नियत से सिर में वाइटल पार्ट होता है चाकू से चार गहरे चोटें पहुंचाई। विशेष न्यायाधीश ने हत्या के प्रयास में दोषी भानू सोनकर को 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा उसकी पत्नी अशर्फी देवी को 8 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 20-20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। साथ ही दोनों को धमकी देने के मामले में 2-2 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाया। वहीं अशर्फी देवी को गाली देने के मामले में एक वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा हो जाने पर 10-10 हजार रुपए घायल को देने का आदेश दिया।
वहीं बबलू को नाबालिग के साथ छेड़छाड़ करने का दोषी पाते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा हो जाने पर 10 हजार रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया। वहीं आरोपी पिंटू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के खैराबाद सोनकर बस्ती का है।
अभियोजन के अनुसार 23 अप्रैल 2016 को बकरी के विवाद को लेकर अभियुक्त भानू सोनकर ने अपनी पत्नी अशर्फी देवी के उकसाने पर वादी मुकदमा की पत्नी को जान से मारने की नीयत से जमीन पर पटककर सिर पर चाकू से प्रहार किया। जिसमें उसे गंभीर चोटें आई। आरोप है कि इस दौरान आरोपी बबलू सोनकर ने वादी की नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ की और पिंटू मंगलसूत्र और झुमका छीन लिया। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक ने 10 गवाहों को पेशकर पक्ष रखा। बचाव पक्ष से तीन गवाहों को पेशकर तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी पिंटू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं आरोपी बबलू को नाबालिग के साथ छेड़छाड़ करने का दोषी पाया। भानू सोनकर और अशर्फी देवी को हत्या का प्रयास और धमकी देने का दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा का निर्णय सुनाया। न्यायालय में गवाहों को पेश करने मे पैरवीकार आरक्षी अखंड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।