सीएमओ, सभी सीएचसी-पीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकाें, डाक्टरों के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों का नवंबर का वेतन रोक दिया गया है।
ट्रेजरी आफिस ने इनका वेतन बिल लेने से इनकार कर दिया है। ट्रेजरी आफिस ने कर्मचारियों का प्रान नंबर (परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर) देने में हीलाहवाली करने पर यह कदम उठाया है।
ट्रेजरी आफिस के इस निर्णय से विभागीय कर्मियों में नाराजगी है। कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से गुहार भी लगाई थी। उपेक्षा से आहत राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अब आंदोलन के मूड में है।
2004 के बाद से सरकारी सेवाओं में आने वाले कर्मचारियों के लिए नई पेंशन नीति लागू की गई है। इसके लिए प्रान नंबर सभी सरकारी कर्मचारियों का बनाया गया है।
प्रान में 10 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार देती है और दस प्रतिशत धनराशि कर्मचारी के वेतन से जमा किए जाने का प्रावधान है। एकाउंट नंबर नहीं देने के दशा में अंशदान नहीं कराया जा सकता।
ट्रेजरी आफिस ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर प्रान नंबर उपलब्ध कराने को कहा था। स्वास्थ्य विभाग को छोड़कर लगभग सारे विभागाध्यक्षों ने कर्मचारियों के प्रान नंबर ट्रेजरी को नवंबर के मध्य में ही भेज दिया।
लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों का प्रान नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके चलते ट्रेजरी आफिस ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन बिल लेने से ही इनकार कर दिया।
उधर स्वास्थ्य विभाग के वेतन आहरण वितरण अधिकारी आरके मिश्रा का कहना है कि सभी सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों से कर्मचारियों के प्रान नंबर मांगा गया है, लेकिन अब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उधर वेतन वितरण में विलंब होते देख राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष और मंत्री सीताराम कुशवाहा ने जिलाधिकारी चंद्रकांत पंाडेय से मिलकर वेतन वितरण समय से कराने की गुहार लगाई थी।
विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अब आंदोलन के मूड में है।