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युद्ध क्षेत्र से बाहर तो निकले अब पढ़ाई की फिक्र

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यूक्रेन से लौटने के बाद अपने परिवार के साथ दुबारी निवासी अदित्य दूबे।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र युद्ध क्षेत्र की भयावहता से बाहर तो निकल आए लेकिन उन्हें पढ़ाई की चिंता सता रही है। छात्रों के परिजन भी इसे लेकर फिक्रमंद हैं कि आखिर कैसे उनके बच्चे की डाक्टरी की पढ़ाई पूरी होगी। बढ़ुआगोदाम निवासी नागेंद्र कुमार गुप्ता 2017 में यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था। युद्ध छिड़ने के बाद घर लौटा। नागेंद्र का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने को लेकर वह बेहद चिंतित है। दुबारी निवासी आदित्य दूबे भी पिछले पांच साल से यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे थे। बताया कि वह पांचवें वर्ष के अंतिम सेमेस्टर में हैं। लेकिन युद्ध छिड़ने के कारण उन्हें घर लौटना पड़ा है। अभी आनलाइन क्लासेज चलाई जा रही हैं। जून में अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी होने वाली थी। आदित्य के पिता दिनेश दूबे ने बताया कि पांच साल पहले अपने बेटे को डाक्टर बनाने के लिए यूक्रेन भेजा था। हर वर्ष 3.85 लाख फीस लगती है। उनकी प्रदेश सरकार से मांग है कि उन्हें राजकीय मेडिकल कालेजों में प्रवेश दिलाकर पढ़ाई पूरी कराई जाए। आदित्य ने बताया कि मेडिकल में प्रेक्टिकल और क्लीनिकली पढ़ाई की अहमियत होती है, जो आनलाइन माध्यम से संभव नहीं है।
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