कोरोना की दूसरी लहर बीतने के बाद अब तीसरे लहर की आशंका बनी हुई है। लेकिन अभी तक जिला अस्पताल में इंटेसिंव केयर यूनिट (आईसीयू) प्रारंभ नहीं किया जा सका है। अस्पताल में अलग से इसके लिए कक्ष भी बना है। बावजूद इसके अभी तक यहां आईसीयू की सुविधा नहीं मरीजों को नहीं मिल रही है। हालांकि अस्पताल में लाखों की कीमत के दो वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं। विभाग उपकरण और मानव संसाधनों को रोना रो रहा है। जिला अस्पताल प्रशासन के चलर रवैये का खामियाजा जिले के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। स्थित यह है कि गंभीर मरीजों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों का रूख करना पड़ रहा है। जबकि जिला अस्पताल में लाखों की कीमत के दो वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इसके संचालन के लिए अस्पताल में आईसीयू के संचालन के लिए एमडी मेडिसिन, एनेस्थेटिक, कार्डियोलाजिस्ट सहित अन्य स्टाफ की जरूरत होती है। लेकिन विभाग में पर्याप्त डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण आईसीयू वार्ड होने के बाद भी इसका संचालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2014 में ही जिला अस्पताल के ब्लड बैंक परिसर में आईसीयू स्थापित की गई थी। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सक तथा कार्डियोलॉलिस्ट की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जिस कारण यहां मरीजों को आईसीयू का लाभ नहीं मिल रहा है। सड़क दुर्घटना तथा दूसरे गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल में लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद बीएचयू रेफर कर दिया जा रहा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजकुमार ने कहा कि मानव संसाधनों की कमी के कारण इस यूनिट को प्रारंभ नहीं किया जा सका है। उपकरण व तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। लेकिन शासन की तरफ से अभी तक कोई सार्थक जवाब नहीं आया है।