मऊ। जनपद की नहरें इस समय सूखी हैं। नहरों में पानी न होने के चलते किसान अपनी गन्ना सहित अन्य फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। खेतों में बोए गए हरे चारे और हर सब्जियों को हरा भरा रहे रख पाने की चुनौती किसानों के समक्ष खड़ी हो गई है। किसान धान की नर्सरी डालने के लिए खेतों की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। जनपद के दो तिहाई क्षेत्रफल में खेतों में लगी फसलों की सिंचाई के लिए किसान दोहरीघाट पंप कैनाल और शारदा सहायक खंड 32 नहर पर आश्रित रहते हैं। इन दोनों नहरों में काफी दिनों से पानी नहीं है। नहरों में पानी न होने के चलते किसान खेतों में बोई गई गन्ना और पेड़ी की फसल को बचा पाने के लिए परेशानी का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा खेतों में हरे चारे को हरा भरा रख पाने के लिए भी किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसी तरह हरी सब्जियों को बचा पाना भी किसानों के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। इस समय मई का लगभग आधा महीना भी चुका है लेकिन नहरों में पानी न होने से किसान धान की नर्सरी डालने की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। इस बाबत किसान अमरजीत यादव, परमात्मानंद सिंह, राकेश सिंह, मन्नू पहलवान, राम नवल राही, आनंद यादव, देव प्रकाश राय, शिवाकांत सिंह, बबलू यादव, कैलाश यादव आदि किसानों का कहना है कि जरूरत के समय नहरों में पानी नहीं है जिससे किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मध्यम वर्ग के किसान डेढ़ सौ रुपए घंटे की दर से पंप सेट अथवा डीजल इंजन से पानी चला कर खेतों की सिंचाई कर पाने में लाचार हैं। किसानों की मांग है कि इस समय नहरों में पानी छोड़ा जाए जिससे फसलों की सिंचाई की जा सके। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज का कहना है कि शारदा सहायक खंड 32 नहर मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है लेकिन दोहरीघाट पंप कैनाल में पानी जल्दी ही छोड़ा जाएगा।