मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 3 दिनेश कुमार चौरसिया ने हत्या के मामले में नामजद छह आरोपियों में एक को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा दी। साथ ही 10 हजार 600 रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। जबकि चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते दोषमुक्त कर दिया, एक आरोपी की दौरान विचारण मौत हो जाने से मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के भदवां गांव निवासिनी बदामी देवी पत्नी चंद्रिका की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही वीरेंद्रू, रामानंद, मनोज, संतोषू, मोतीराम और कन्हैया को नामजद किया। वादिनी का कथन है कि ईंट ले जाने से रोकने की बात को लेकर आरोपियों ने उसके ससुर सिद्धू, सुनील, बबिता और जगदीश को 19 जुलाई 2008 को मारपीट कर घायल कर दिया। इलाज के दौरान सिद्धू की मौत हो गई। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक राणा प्रताप सिंह व नंदलाल भारती ने 13 गवाहों को पेश किया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी रामानंद को मारपीट व हत्या का दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि आरोपी वीरेंद्र की दौरान विचारण मौत हो जाने से मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। वहीं आरोपीगण मनोज, संतोष, मोतीराम और कन्हैया को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।