स्थानीय तहसील क्षेत्र के परसुरामपुर निवासिनी शहनाज और करजाना भी छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य देंगी। जबकि हाशिम डाला उठाएंगी। पर्व को लेकर पूरा परिवार तैयारी में जुटा हुआ है। घाट पर बेदी बनाने के साथ पर्व पर लगने वाले सामान की खरीदारी हो रही है। कोई भी सामान छूटने न पाए इसके लिए दोनों महिलाएं खुद नजर रखे हुई हैं। शहनाज बताती हैं कि पुत्र काफी दिनों से बीमार था, कई जगह उपचार कराने के बाद भी उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो रहा था। चार वर्ष पहले गांव की महिलाओं ने छठ पर्व के बारे में जानकारी दी। पुत्र की लंबी आयु की कामना के साथ उसने विधि पूर्वक छठ पर्व का अनुष्ठान किया। धीरे-धीरे पुत्र के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया। इसके बाद निश्चय किया कि वह हमेशा छठ पर्व का अनुष्ठान करेंगी। तब से यह दोनों परिवार छठ पर्व की पूजा अर्चना करता है। हाशिम बताती हैं कि छठ पर्व को लेकर डाला की तैयारी वह खुद करती हैं। इसमें छठ में सूर्य को अर्घ्य देने के लिए डाला को बहुत ही खूबसूरत तरीके से तैयार किया जाता है। डाला बांस के फट्टे से बना होता है। जो सूर्य को अर्घ्य के लिए विशेष तौर पर सजाया जाता है। डाला में श्रृंगार का सारा सामान फूल, फल, चावल के लड्डू, पुआ, ठेकुआ आदि रखे जाते हैं।