बसंत पंचती पर्व पर नगर के हिंदी भवन में हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित साहित्यिक गो?
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मऊ। हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में निराला जयंती के अवसर पर शनिवार को नगर स्थित हिंदी भवन के सभागार मेें काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी रचनाएं पेश की। इस अवसर पर डॉ. अवनींद्र कुमार पांडेय ने हमको खुशियां अपार देती है, हमको जी भर दुलार देती है, रखके सर पर हाथों को अपने, सारी पीड़ा उतार देती है सुनाया। बापू नंदन मिश्र ने महाप्राण है वही जो हिंदी पुत्र निराला है प्रस्तुत किया। पंकज प्रखर ने गाए जिसको जग जीवन भर, ऐसी अमिट कहानी लिख दूं प्रेम गीत पढ़ा। इसके बाद शशिकांत वर्मा ने शब्द शीर्षक कविता के माध्यम से शब्द के असर का व्यापक वर्णन करते हुए शब्दों के साधने की कला को विकसित करने का संदेश दिया। नव गीतकार शतानंद ने निराला के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए निरालाजी के जीवन के विविध प्रसंगों का उल्लेख किया। जितेंद्र मिश्र काका ने संबंधों के खोखलेपन को रेखांकित किया। गीतकार राघवेंद्र प्रताप सिंह ने एक हंसी बाजारु सांस लिए भाड़े की, रामदीन सोच रहा, अगले पखवाड़े की प्रस्तुत किया। गीतकार दयाशंकर तिवारी ने आमि के डारि पे कोइल गान सुनाई सुधा बरसावत फागुन महुआ के बारि में मधु टपकावत, मन मनसिज बहकावत फागुन सुनाया। इस अवसर पर रमाशंकर सिंह, देवनाथ सिंह, शमीम अहमद, नंदकिशोर थरड, सुशील कुमार अग्रवाल, पंकज कपूर सहित आदि शामिल रहे।