मऊ। जिले के कोपागंज में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद रेड जोन में आए मऊ जिले को बाद में तीसरी रिपोर्ट आने पर भले ही ऑरेंज जोन में तब्दील कर दिया गया। लेकिन ग्रीन जोन में आने के लिए जिले वासियों को अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा। तभी शासन से प्रदत्त ग्रीन जोन की सुविधाओं का लाभ जिलेवासियों को मिल सकेगा। बताते चले बीते 29 मार्च को देवबंद से लौटे कोपागंज के दोस्तपुरा निवासी युवक की जांच रिपोर्ट 19 मार्च को पॉजिटिव आने पर हड़कंप मच गया। इस दौरान मऊ भी रेड जोन में आ गया था। क्वारंटीन किए गए युवक की दूसरी रिपोर्ट वाराणसी में डंफ पड़ गई। इस दौरान उसका तीसरा नमूना लेकर जांच के लिए गोरखपुर भेजा गया। यह रिपोर्ट तीन मई को निगेटिव आई है। सीएमओ डा. एससी सिंह की मानें तो लगातार दो रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही मरीज को स्वस्थ्य माना जाता है। ऐसे में मेडिकल कालेज आजमगढ़ में भर्ती युवक की चौथी रिपोर्ट आने का इंतेजार है। यदि यह रिपोर्ट भी निगेटिव आती है तो मरीज को होम क्वारंटीन किया जाएगा। 28 दिन बाद एक रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इस पर केंद्र सरकार निर्णय लेगी कि आखिर जिले को किस जोन में रखा जाए। इससे पूर्व कांझा गांव में आए सिपाही के पिता एडीओ पंचायत सहित परिवार के 19 लोगों के रिपोर्ट के आने का इंतेेजार है। क्योंकि वाराणसी टेस्ट लैब में काम करने वाली महिला कर्मचारी के संक्रमित होने पर जांच को गए सभी नमूने वहां रुके हैं। इसके चलते जिले को ग्रीन जोन में आने के लिए आने वाली यह जांच रिपोर्ट भी चुनौती बनी है। बताते चले कोपागंज में कोरोना पॉजिटिव मिले युवक के परिवार के सदस्यों के साथ आसपास रहने वाले 76 लोगों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। इसके अलावा कोपागंज ब्लाक मुख्यालय के साथ पूरे ब्लाक क्षेत्र से लिए गए 129 नमूनों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। सीएमओ डा. एससी सिंह ने बताया कि ग्रीन जोन में आने के लिए आवश्यक है लॉक डाउन के नियम माने जाएं। घरों से निकलते समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। बाहर से आने वालों के बारे में समय रहते प्रशासन को सूचित करें। तभी संभव है कि जिला ग्रीन जोन में वापस लौटे।