दोहरीघाट घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से घटने से तटवर्ती इलाके के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन कटान का खतरा बढ़ गया है। मुक्तिधाम सहित कस्बे की ऐतिहासिक धरोहरों पर संकट बरकरार है। नदी की उफनती लहरे सीधे तटवर्ती इलाकों से टकराकर बैरोकलिंग कर रही है। जिससे कस्बे के ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व संकट में है। घाघरा का जलस्तर मंगलवार को 69.95 मीटर दर्ज था। जो 24 घंटे में 20 सेमी घटकर 69.75 मीटर पर पहुंच गया। नदी इस समय खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 15 सेमी नीचे बह रही है। नदी के दबाव से नगर की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें भारत माता मंदिर, मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, डीहबाबा का मंदिर पर खतरा बरकरार है।घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार नवली, चिउटीडांड, बहादुरपुर, सरया , पतनई, गोधनी, ठाकुरगांव बीबीपुर, ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, पाउस, कोरौली, बेलौली, चंद्राबारी, महुआबारी, महुआबारी, रसूलपुर सहित आदि गांवों पर अभी भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वही तटवर्ती इलाकों में जलस्तर घटने से कटान का खतरा बढ़ गया है। कटान की आशंका को लेकर संवेदनशील स्थानों पर सिंचाई विभाग की तरफ से बोल्डर रखा जा रहा है।