फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार की मिले जानकारी

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। देश का संविधान लागू होने के सात दशक बाद भी संविधान का शत प्रतिशत अनुपालन नहीं हो पा रहा है। लोगों को संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार की जानकारी तक नहीं हो पाई है। शासन प्रशासन की ओर से जागरुकता का दावा तो किया जाता है। लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही है। देश को आजादी मिलने के बाद आम लोगों को हक व अधिकार दिलाने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया। प्रतिवर्ष लोगों को मौलिक अधिकारों व कर्तव्य के बारे में जागरुक किया जाता है। हालत यह है कि जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाने में खानापूर्ति से बड़े तबके को संविधान में प्रदत्त अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में जानकारी नहीं हो पाई है। वरिष्ठ नागरिकों की मानें तो संविधान का प्रशासन की तरफ से कड़ाई से अनुपालन न किए जाने से आज लोग नियम कानून तोड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को जागरुक करने की जरूरत है। वरिष्ठ नागरिक दयाशंकर तिवारी का कहना है कि संविधान का शत प्रतिशत अनुपालन नहीं हो पा रहा है। शासन प्रशासन को सख्ती बरतनी चाहिए। जागरुकता से लोगों को मौलिक अधिकार की जानकारी दी जाए। सेवानिवृत्त शिक्षक रामजी उपाध्याय का कहना है कि संविधान लागू होने के दशकों बाद भी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं मिल सकी है। अपने हक व अधिकार की आवाज उठाने पर बेवजह परेशान किया जाता है। ऐसे में मानीटरिंग सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें