महिला जिला अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। जिला महिला अस्पताल को बगल में बने पांच मंजिला नए भवन में मैटरनिटी विंग में शिफ्ट कर संचालित किया जा रहा है। करीब एक दशक से पुराने कंडम भवन को तोड़ने की कवायद सात साल से चल रही है। लेकिन अभी तक भवन को तोड़ने के लिए नीलामी प्रक्रिया नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि भवन को तोड़ने का काम लोक निर्माण विभाग का है। विभाग की तरफ से लोक निर्माण विभाग को पत्राचार किया जा चुका है। वहीं लोेक निमार्ण के अधिकारी इस बाबत सवाल पूछने पर कन्नी काट रहे हैं।
जिला अस्पताल का भवन जर्जर होने के दौरान ही 2011 में मेटरनिटी विंग का निर्माण शुरू किया गया था। करीब सात साल में काम पूरा होने के बाद उसे चालू किया गया था। इसी बीच 100 बेड वाला महिला जिला अस्पताल का भवन करीब पांच वर्षों से मेटरनिटी विंग के पांच मंजिला भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे तो मेटरनिटी विंग में ओपीडी का संचालन नहीं हो सकता, लेकिन महिला अस्पताल का पुराना भवन बेहद जर्जर होने चलते मेटरनिटी विंग के साथ इसमें ओपीडी का भी संचालन हो रहा है।
अमर उजाला ने भी जर्जर भवन में संचालित महिला अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर 31 जुलाई 2018 को टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव सहित दूसरे शीर्षकों से कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिस पर दो अगस्त 2018 को तत्कालीन सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी ने पहुंचकर महिला जिला अस्पताल को नवीन भवन में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। जिस पर 2019 में नवरात्र पर तत्कालीन सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता ने पांच मंजिला भवन के बनने पर अस्पताल को शिफ्ट करवाया था। उधर कंडम घोषित हो चुके पुराने जिला महिला अस्पताल को ध्वस्त कर उस जमीन पर नया भवन बनाने से पहले उसे गिराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोक निर्माण विभाग को पत्र लिख चुका है।
एमसीएच विंग में मां-शिशु का होता है इलाज
मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच विंग) में मां और शिशु का उपचार एक ही छत के नीचे किया जाता है। प्रसव से पहले गर्भवती महिला को इस विंग में रखा जाता है। प्रसव के बाद शिशु के इलाज के साथ मां का इलाज इसी विंग में किया जाता है। एमसीएच विंग से जनपद के गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं का इलाज आसान हुआ है। इससे डाक्टर सहित मरीज और उनके तीमारदारों को काफी सहूलियत मिलती है।
कंडम भवन के टूटने के बाद कैसा होगा स्वरूप
कंडम भवन टूटने के बाद उसी जगह पर नया महिला अस्पताल बनाया जाएगा। इससे एमसीएच विंग पर पड़ने वाला भार भी कम होेगा। आम तौर पर एमसीएच विंग में सिर्फ डिलीवरी होने वाली महिलाओं के साथ नवजात का उपचार किया जाता है। नए भवन बनने के बाद से जिला महिला अस्पताल में महिलाओं को चिकित्सकीय सुविधा दी जाएंगी।
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कंडम भवन को तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा गया है। भवन को तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग को ही काम करना है।- प्रेमचंद, जेई स्वास्थ्य विभाग
भवन को ताेड़ने के लिए कवायद चल रही है। प्रयास है कि जल्द ही सभी आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए और भवन को तोड़ा जाए।-चक्रेश केन, एक्सईन, लोक निर्माण विभाग