सूरजपुर। घाघरा के जलस्तर में घटाव के बाद कटान शुरू होने से लोग दहशत में हैं। रसूलपुर गांव के परिखापुर के ठीक सामने एवं बैकरोलिंग होने के कारण रसूलपुर आश्रम पर कटान शुरू हो गया। मौके पर पहुंचे आला अधिकारी कटान रोकने का उपाय करते तब तक दो विशालकाय पेड़ घाघरा नदी में समा गए। नदी में हों रहीं कटान की सूचना पर सभी ग्रामीण आनन-फानन में का नदी के किनारे पहुंचे और नदी में हों रहीं कटान के चलते ग्रामीणों को अपने आशियाने कटने का भय सताने लगा। आनन-फानन में ग्रामीणों ने रसूलपुर आश्रम पर सरयू नदी में हों रहीं कटान की सूचना सिंचाई विभाग के जेई कमलेश यादव को दी। जब तक सिंचाई विभाग के अधिकारी रसूलपुर आश्रम पर पहुंचते तब तक सरयू नदी सिंचाई विभाग के द्वारा पूर्व में नदी के कटान को रोकने के लिए दो जगहों पर ईंट पत्थरों से बने दो बड़े बड़े स्टड को नदी अपने अंदर समाहित कर चुकी थी। नदी में बैकरोलिग के कारण नदी अपने अंदर ईंट पत्थरों से बने दो स्टड के साथ साथ तीस मीटर की लंबाई में एवं दो मीटर की चौड़ाई में पक्की जमीन और दो बड़े पेड़ भी नदी अपने अंदर समाहित कर चुकी थी। जिसके कारण घाघरा नदी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले रमायन यादव, शिवनाथ यादव, हरिश्चंद्र यादव, नरसिंह यादव, पारस यादव, तेज बहादुर यादव, अवधेश यादव, केदार यादव, सहित सभी ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। कटानपीडितों का कहना था कि कटान से सैकड़ों बीघा जमीन, कई लोगों का रिहायशी पक्का मकान नदी में समाहित हो गया लेकिन अभी तक कटान रोकने का उपाय करना तो दूर कार्ययोजना नही बनाई जा सकी है।