मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो आसिफ इकबाल रिजवी ने छह वर्ष पूर्व प्रभुशंकर चौबे की हुई हत्या के मामले में नामजद 10 आरोपियों में पांच को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। पांच आरोपियों की दौरान विचारण मौत हो जाने से उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। मामला रानीपुर थाना क्षेत्र का है। क्षेत्र के बरवां गांव निवासी दयाशंकर चौबे की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन था कि पुरानी रंजिश को लेकर 14 जुलाई 2015 को आरोपीगण ने उसके भाई प्रभुशंकर चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी। मामले में सुरेंद्र प्रसाद चौबे, लालती यादव, आनंद चौबे, राजेश तिवारी, रामनाथ चौबे, अजय शंकर चौबे, लालू यादव उर्फ विनोद, सुजीत सिंह बुढ़वा, जयहिंद यादव और धर्मेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने सात गवाह पेश किए। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तगण लालती यादव, आनंद चौबे, राजेश तिवारी, रामनाथ चौबे और अजय शंकर चौबे को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। आरोपीगण सुरेंद्र प्रसाद चौबे, लालू यादव उर्फ विनोद यादव, सुजीत सिंह बुढ़वा, जयहिंद यादव और धर्मेंद्र सिंह की दौरान विचारण मौत हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।