चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच नगर के गाजीपुर तिराहा से मुंह बांधकर जातीं युवतियां।संवाद
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मऊ। अप्रैल माह में ही मई-जून जैसी तपिश और लू के थपेड़ों से लोगों का बुरा हाल है। सोमवार को तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। आसमान से बरसती आग ने घर से निकलना मुश्किल कर दिया है। दोपहर में सड़कें सुनसान हो जा रही हैं। लोग जरूरी कार्य से बाहर निकल रहे हैं। युवतियां, महिलाओं के साथ पुरुष भी मुंह बांधकर निकल रहे हैं। बीते एक सप्ताह से अधिकतम तापमान लगभग 40 तो न्यूनतम तापमान लगभग 22 डिग्री सेल्सियस रहा। पछुआ हवा के कारण तपिश और भी ज्यादा महसूस हो रही है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि धूप से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना अनिवार्य है। लोग ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करें। प्रतिदिन पांच से छह लीटर पानी के साथ ही नींबू, चीनी व नमक का घोल बनाकर सेवन पिएं जिससे लू से बचा जा सके।मधुबन संवाददाता के अनुसार तहसील क्षेत्र में मौसम की बेरुखी इस तरह है कि मई-जून का अहसास होने लगा है। तीखी धूप से चंद कदम चलने के बाद ही गला सूख जा रहा है। वहीं गांव एवं कस्बे में लगे अधिकतर प्याऊ, एवं सरकारी हैंडपंप खराब होने से शुद्ध पानी भी मयस्सर नहीं हो पा रहा है।सुबह आठ बजे के बाद ही धूप इतनी तेज हो जा रही है कि मानों त्वचा ही झुलस जा रही हो। धूप में खड़े वाहन तवे की तरह से जलने लगते हैं एवं जानवर प्यास से तड़फड़ाने लग रहे हैं। वही लोग घर से बाहर निकल रहे हैं जिनको जरूरी काम है। कुछ लोग तो सुबह आठ-नौ बजे के बीच ही अपने कार्य को निबटा रहे हैं।पिछले एक सप्ताह से यही स्थिति चल रही है। सुबह के 10 बजने के बाद घर से निकलना मुश्किल हो गया। जरूरी काम से निकलना जिनकी मजबूरी रही वे बचाव के लिए गमछा, टोपी और धूप का चश्मा लगाकर निकले। गाव एवं नगर में पीने के पानी का संकट भी उत्पन्न हो गया है। प्याऊ की व्यवस्था न होने से राहगीर इधर-उधर पानी के लिए भटक रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार इसका ध्यान नहीं दे रहे।