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पिता और बेटी के संबंध का दुनिया में नहीं हो सकता कोई मोल

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नगर के फातिमा तिराहा स्थित सर्व सिद्धि मनकामना पूर्ति मंदिर दुर्गा मंदिर के तत्वाधान में चल रही ? - फोटो : MAU
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मऊ। सर्व सिद्धि मनकामना पूर्ति मंदिर दुर्गा मंदिर के तत्वावधान में फातिमा तिराहा स्थित एक मैरिज हॉल में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में प्रयाग से पधारी मानस मंदाकिनी रागिनी सरस्वती ने कहा कि पिता और बेटी के संबंध का दुनिया में कोई मोल नहीं हो सकता। बेटी का जीवन मेहंदी की तरह है जो पीसकर रंग लाती है।
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उन्होंने कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं है, इसलिए सोच में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। राजा जनक अपनी पुत्री जानकी के नाम से पहचाने जाते हैं। उनके पुत्र लक्ष्मी निधि के कारण नहीं। उसी तरह हिमाचल का नाम भी माता पार्वती के कारण है। राम विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने लोकगीतों के माध्यम से भी मिथिला की छवि प्रस्तुत की। भगवान श्री राम की लालित्य मई कथा का रसास्वादन कराया। कहा कि शिव धनुष अहंकार का प्रतीक है जिस का टूटना आवश्यक है क्योंकि यदि टूटा नहीं होता तो भक्ति और भगवान का मिलन नहीं होता। यदि टूटा नहीं होता तो मिथिला और अयोध्या का मिलन नहीं होता। अहंकार टूटना ही अच्छा होता है तभी संबंधों में मधुरता आ सकती है। अलौकिक दृष्टिकोण से उन्होंने दहेज का रूप उस धनुष को बताया जिसको तोड़ना अति आवश्यक है, क्योंकि राघवेंद्र सरकार उस दहेज रूपी धन उसको भी समाज से निकालने का प्रयास करते हैं कथा वही है जो जीवन की हर व्यथा को समाप्त करें। कुरीतियों और बुराइयों को निकालकर समरसता का संचार करें।
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