कोपागंज। काछी कला हुसैनी बस्ती स्थित मस्जिदे जहरा के पास सोमवार की रात शब्बेदारी में अजादारों ने जमकर मातम किया। यहां ‘हाय सकीना, हाय प्यास’ की सदाएं गूंजती रही। इस दौरान अलम, ताबूत और दुलदुल का जुलूस निकाला गया। शब्बीर कमेटी की ओर से आयोजित शब्बेदारी में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना शमशीर अली मुख्तारी और मौलाना हसन रजा ने कहा कि कर्बला इंसानियत की एक दर्सगाह है। इमाम हुसैन की कुर्बानी ने न सिर्फ इस्लाम को बचाया बल्कि पूरी इंसानियत को बचाया है। उनके उनपर जुल्म की इन्तेहा कर दी गई मगर फिर भी उन्होंने सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ा। अपने छह माह के बालक की शहादत दे दी। सिर कटा दिया मगर जालिम के आगे सर नहीं झुकाया। बीमार बेटे इमाम सज्जाद को जालिमों ने कैद कर कांटों और अंगारों पर चलाया। मजलिस के बाद छोटे बच्चों ने आग पर चल कर इमाम को पुरसा पेश किया।
इस मौके पर अंजुमन जफरिया, अंजुमन हैदरी रजिस्टर्ड, अंजुमन इमामिया कदीम, अंजुमन इमामिया रजिस्टर्ड, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन सज्जिया रजिस्टर्ड और कमेटी शेरे शब्बीर ने नौहाखानी व सीनाजनी की। मौलाना मुंतजिर अब्बास ने फातिमा जहरा को उनके लाल का पुरसा पेश किया। साथ ही अजादारों को शबीहे जुल्जना, अलम अब्बास और शबीहे18 बनी हाशिम की जियारत कराई। संचालन मौलाना नैयर अली ने किया।