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अपनों के बीच सादगी से ही मनेगी ईद की खुशी

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मऊ। तीस रोजों के बाद अल्लाह रोजेदारों को तोहफा देता है ,वो ईद की खुशी ही तो है। लेकिन इस बार त्योहार की खुशियां थोड़ा दायरे में रह रक सादगी से मनाई जाएगी। ईदगाह और मसजिदों में ईद की नमाज के लिए न लंबी सफें होंगी और ना ही बच्चों को लुभाने वाला मेला ही लगेगा। इस बार की ईद की खुशियों में सादगी का नूर होगा। गले और हाथ मिलाकर ईद की मुुबारकवाद भी नहीं दी जा सकेगी। जो दूर हैं वो लाकडाउन की वजह से अपने घर नहीं आ पाएंगे। ऐसे में अपनों से ईद की खुशियां बांटने का जरिया मोबाइल और वीडियोकाल ही होगा। मौलाना अबसारुल हक कासमी ने कहा कि इस बार ईद हमारी लाकडाउन रहेगी। जिस तरह हमारा पूरा रमजान सादगी से गुजर गया वैसे ही ईद भी सदगी से मनाई जाएगी। हमारा ये फर्ज बनता है कि 30 रोजों के बदले में अल्लाह के दिए इस तोहफे को दिल से कुबूूल करें और ईद सादगी से मनाएं। मुनव्वर अली कहा कि हमारी जिंदगी में ऐसी आपदा पहली बार आई है। दो दिन बाद ईद भी है। ईद की नमाज भीहम घर में पढ़ेंगे। मसजिदों में ईद की नमाज नहीं होगी लेकिन घरों में कोशिश होगी कि चार से पांच लोगों की जमात के साथ सोशल डिस्टेंसिंग के साथ नमाज अदा की जाए। दुनिया जिस वमुसीबत को सह रही है , उस बला से निजात के लिए ईद पर भी बारगाहे इलाही में दुआ मांगी जाएगी। राशिद अबरार कहा कि हम अल्लाह की नासुकी कतई नहीं कर सकते हैं। अल्लाह ने ईद हमें तोहफे में दी है। इसे हम कुबूल करेंगे। ईद की रौनक , वो जोशो खरोस नहीं होगा, हम पूरे ऐहतेराम के साथ ईद मनाएंगे। नये कपड़े नहीं होंगे , इसका मलाल नहीं है। किसी को गले लगाकर मुबारकवाद नहीं दे सकेंगे ,ये जरूर हमें खलेगा। जैद मजहर ने कहा कि ईद हर मुसलमान के लिए शुकराने की नमाज है। ईद की नमाज बडे जगहों , बडे आलम के बीच होती है, वो नहीं होगी,लेकिन उस दिन भी हमारी यही दुआ होगी कि अल्लाह पाक दुनिया को इस वबा से निजात दिलाएं। हिंदुस्तान का हर इंसान हिफाजत से रहे। इसे मिल्लत के साथ ही मनाया जाएगा।
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