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ईद-ए-गदीर : महफिलों में हुआ हजरत अली की शान का जिक्र

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कोपागंज। कस्बा सदर चौक मोहल्ला फुलेल पूरा के सहन में हजरत अली की ताजपोशी की खुशी में रविवार मोमिन-ए-कोपागंज की ओर से महफिल का आयोजन किया गया। ‘जश्ने ताजपोशी हजरत अली’ में शायरों ने मौला अली की शान में कसीदे पढ़े। महफिल का आगाज मौलाना जहीरुल हसन ने तिलावते कुरान पाक से किया। उसके बाद शायरों ने अपने अंदाज में कसीदे पढे़। कलीम मारूफी ने पढ़ा, ‘बाजू उठा उठा के दिखाते रहे रसूल ,अंधों ने फिर भी कुछ न देखा गदीर में...’। जफर हैदर शमशी ने पढ़ा ‘अम्बिया हो, मलक हो या कि बशर, ईद-ए-अकबर मना रहे हैं सभी’। महफिल की सदारत करते हुए शिया जामा मस्जिद कोपागंज के इमाम-ए-जुमा मौलाना हसन रजा साहब ने कहा कि रसूल-ए-खुदा ने फरमाया कि ईद-ए-गदीर मेरी उम्मत की सबसे बड़ी ईद है। हजरत अली फरमाते हैं कि आज के दिन की नेकी माल व जिंदगी को बढ़ाती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आप ये चाहते हैं कि जमीन और आसमान की तमाम बलाओं से महफूज रहें तो ईद-ए-गदीर के दिन नया लिबास पहनो। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी व समाज सेवी अली जफर ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए सबसे बड़ी ईद का दिन है। जो सिर्फ शियाने हैदर-ए कर्रार की ईद है। छठें इमाम फरमाते हैं कि जिसने नमाज-ए-गदीर अदा की, उसे एक लाख हज व एक लाख उमरे का सवाब मिलता है। जिसने एक आदमी को खाना खिलाया उसने पूरी इंसानियत को खाना खिलाया और जिसने आज के दिन एक दिरहम दिया, उसने हजार दिरहम दिए। महफिल के समापन पर मिठाइयों, फलों और पकवानों पर हजरत अली के नाम से फातिहा दिलाई गई। लोगों ने एक दूसरे को ईद-ए-गदीर की मुबारकबाद दी। इस मौके पर शरीफुल हसन, मौलाना तकी आबिद, जनाब हसनैन साहब, जावेद , जमील असगर गुड्डू, शमीम मेहंदी (भाजपा नेता) बाकर रजा शीबू, जफरुल नकी, सकलैन हैदर, अकबर अली, आबिद अली, आसिफ, इरशाद अली आदि मौजूद रहे।
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