मऊ। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1987 से प्रतिवर्ष 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, ताकि तंबाकू द्वारा फैलाई गई महामारियों की ओर ध्यान आकर्षित कर सके। अमर उजाला कुछ ऐसे लोगों से बातचीत कर रहा है जो पहले धूम्रपान के जद में थे, लेकिन इच्छाशक्ति के दम पर न केवल उन्होंने नशे को छोड़ा बल्कि वो आज दूसरों को नशे के नुकसान के बारे में जागरूक कर उनके लिए मिसाल बन रहे हैं। नगर क्षेत्र के राजपूत मार्केट निवासी चंदन खरवार (28) बताते हैं कि उन्हें किशोरावस्था में नशे की लत लग गई थी। कुछ वर्षों बाद उसने नशे को त्यागने का निर्णय लिया और तंबाकू का त्याग कर दिया। नशा त्यागने के बाद से वह अपने आप को स्वस्थ महसूस करते हैं। वहीं गाजीपुर जिले के 60 वर्षीय बालकरन यादव बताते है कि वह युवावस्था से ही पान-तंबाकू की लत लग गई। नशे के सेवन से उनका स्वास्थ्य दिन-रात गिरता गया।इतना ही इससे भूख और नींद का अभाव रहने लगा। इसके बाद वह जिला अस्पताल के तंबाकू उन्मूलन केंद्र पहुंचे और काउंसिलिंग कराई। वहां डॉ. अश्वनी सिंह ने तंबाकू के खतरे से अवगत कराया। बस उसी क्षण मैंने प्रतिबद्ध होकर तंबाकू के उत्पादों से तौबा कर ली। वहीं डॉ. अश्वनी कुमार सिंह (जिला सलाहकार तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम मऊ) बताते है कि वर्तमान में नशे की जद में युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा आ रही है। इसके पीछे वजह है कि इनमें सिगरेट तथा तंबाकू का सेवन का आकर्षक। इससे मुंह के कैंसर की संभावना ज्यादा रहती है। तंबाकू से मुंह में कई प्रकार की समस्याएं होती हैं। इससे मुंह का पूरा नहीं खुलना, मुंह में सफेदधारियों का बनना, मुंह व गालों में जलन, दांतों का पीला व काला होना, मसूड़ों की पकड़ कम हो जाना मुख्य है। बताया कि तंबाकू के सेवन से तपेदिक ग्रस्त तथा गठिया होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है। इतना ही नहीं, जो लोग इसका सेवन नहीं करते हैं, वह भी तंबाकू के धुएँ से प्रभावित होते हैं, व्यस्कों में कैंसर तथा हृदय रोग तथा बच्चों में श्वांस, कान तथा फेफड़ें भी ठीक प्रकार से कार्य नहीं करते।