वाराणसी से गोरखपुर तक स्वीकृत फोरलेन सड़क के निर्माण से संबंधित प्रारंभिक प्रक्रिया डेढ़ साल से जारी है। फोरलेन में पड़ने वाले किसानों के खेतों में पत्थर लगभग एक साल पहले ही गाड़ कर सीमांकन कर दिया गया । सड़क के लिए भूमि का अधिग्रहण किए जाने के लिए खेतों के गाटा संख्या और क्षेत्रफल आदि प्रकाशित कर दिए गए हैं। कई स्थानों पर सड़क के अंदर पड़ने वाले हरे पेड़ों की कटाई भी शुरू कर दी गई है। लेकिन अब तक प्रभावित किसानों को यह नहीं पता है कि फोरलेन में पड़ने वाली उनकी जमीन का मुआवजा उन्हें किस दर से मिलेगा।
मुुआवजे को लेकर किसानों में संशय बरकरार है। वाराणसी गोरखपुर नेशनल हाईवे को ही सरकार ने फोरलेन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। लेकिन घनी आबादी और बाजारों के बाहर से बाई पास बनाकर इसे जोड़ा जाना है। इसके लिए शहर से बाहर-बाहर बढ़ुआगोदाम से परदहा होते हुए कोपागंज के पश्चिम होते हुए भदसा के पास तक और इसी प्रकार घोसी ,गोंठा दोहरीघाट के बाहर से फोरलेन बाई पास का निर्माण किया जा रहा है।
इसके लिए सभी गांवों के प्रभावित खेतों के स्वामियों के गाटा संख्या,रकबा आदि का प्रकाशन करने के साथ ही आपत्तियां लेने, उनके निस्तारण आदि की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रभावित खेतों में पत्थर गाड़कर विभाग पहले ही सीमांकन कर चुका है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार गाजीपुर जिले से मऊ और गोरखपुर तक फोरलेन बनाने का ठेका जेपी कांस्ट्रक्शन को मिल चुुुका है। किसान नेता लोकदल के प्रदेश सचिव देवप्रकाश राय और जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह कहते हैं कि हमारे देश का कैसा कानून है कि जिन अन्नदाता किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है, उन्हें अब तक यह नहीं पता है कि जो जमीन सरकार सड़क निर्माण के लिए ले रही है उसका मुआवजा उन्हें किस दर से मिलेगा। किसान संशय में जी रहे हैं । उधर कंपनी एक एक कदम आगे बढ़ाते हुए किसानों की जमीन पर सड़क बनाने की ओर अग्रसर हैं।