जिले के कई सरकारी कार्यालयों के भवन जर्जर हो गए हैं, लेकिन सबसे बदहाल हालात आयुर्वेद अस्पतालों का है। जिले के चार तहसील के नौ ब्लाकों में आयुर्वेद के 29 तथा यूनानी के छह अस्पताल हैं। केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं। इसमें कसारा, अमिला, कमलसागर, डुमरांव, गोकुलपुरा सहित आठ अस्पताल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। सबसे बदतर हालत तो कसारा में संचालित अस्पताल की है।वर्तमान में बारिश के बीच चिकित्सक-स्वास्थ्यकर्मी जान को जोखिम पर रखकर रोजाना 50 से ज्यादा मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
कोपागंज ब्लाक के ग्रामीणों को आयुर्वेद से उपचार को लेकर बने इस अस्पताल के भवन को पांच दशक से ज्यादा समय बीत चुका है। एक बार भी मरम्मत न होने से यह इस स्थिति में पहुंच चुका हैं कि बारिश में आए दिन मलबा नीचे गिरता रहता है। बदहाल अस्पताल में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक वार्ड बॉय, एक योग प्रशिक्षक प्रतिदिन 50 से ज्यादा मरीजों का उपचार करते हैं। इस अस्पताल में कसारा, इंदारा, महुआर, रईसा सहित अन्य गांव के लोग पहुंचते हैं।लेकिन वर्तमान में बारिश में अस्पताल में तैनात स्वास्थ्यकर्मी बाहर बैठकर ही मरीजों का उपचार करते हैं। इतना ही नहीं मरीज भी भवन का कंडम हाल देखकर अस्पताल में जाने के बजाए निजी चिकित्सकों को यहां जाकर इलाज कराने को प्राथमिकता देते हैं। एक स्वास्थ्यकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हर साल बारिश से पूर्व इसको लेकर शिकायत की जाती है।इतना ही नहीं किसी बड़ी घटना को लेकर अंदेशा भी जताया जाता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे नजरंदाज किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वह जान हथेली पर लेकर नौकरी कर रहे हैं। जबकि उच्चाधिकारी सब जानते हुए भी लापरवाह बने हुए हैं।