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Mau News: सड़क खोदकर बिछा दी पाइपलाइन लेकिन भूल गए मरम्मत कराना

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मऊ। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत ओवरहेड टैंक निर्माण तथा पाइपलाइन बिछाए जाने का काम चल रहा है। कार्यदायी संस्था लाखों की लागत से बनी सड़क, इंटरलॉकिंग और खड़ंजा मार्गों को खोदकर पाइपलाइन तो बिछा रहे हैं लेकिन पहले की तरह सड़क की मरम्मत नहीं कर रहे हैं। ठेकेदार खानापूर्ति कर मिट्टी पाटकर चले जा रहे हैं। बिना जांच के विभाग भुगतान भी कर दे रहा है।
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जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना के तहत ग्राम पंचायतों में लगातार काम चल रहा है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराए जाने के लिए पाइप बिछाई जा रही है। इसके लिए, जल निगम की ओर से तीन कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे लेकर ठेकेदारों की ओर से कहीं एक तो कहीं दो महीने से अधिक समय से सड़क, इंटरलॉकिंग और खड़ंजा मार्गों को खोदकर छोड़ दिया गया है। इससे लोगों को आवागमन करने में परेशानियों के साथ ही उससे उड़ने वाली धूल से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बीते दो माह से खोदी गई इंटरलॉकिंग का मरम्मत नहीं होने से नाराज कोपागंज ब्लॉक के हिलसा के ग्रामीणों ने गत दिवस कार्यदायी संस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया था। इसी तरह घोसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत पवनी में दो माह पूर्व आरसीसी रोड की खोदाई करने आए ठेकेदार और मजदूरों को ग्रामीणों ने विरोध कर वापस कर दिया था। रतनपुरा ब्लॉक के बड़ागांव, मानिकपुर, कुड़वा, मनपुर और घोसी ब्लॉक के मझवारा, मलेरीकोर्ट, लखनी मुबारकपुर, बैरासी, बिंद्राबन, पवनी, खैरा मुहम्मदपुर में दो माह पूर्व ही पाइपलाइन बिछा दी गयी है।
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मधुबन में हर घर जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए तहसील क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों में अच्छी खासी सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है। दो माह बाद भी मरम्मत नहीं कराई गई। क्षेत्र के मर्यादपुर, ढिलई फिरोजपुर, दुबारी, धर्मपुर बिशनपुर, तिनहरी, हकारीपुर, मलकौली, परसुपुर, अधवारा मटूरी, हृदयपट्टी, कमलसागर, बस्ती वर्सी निधियांव, कवलापट्टी, सिंघासी में दो माह पूर्व ही पाइप लाइन बिछा दी गई है। ठेकेदारों ने खानापूर्ति करते हुए गड्ढों में थोड़ी बहुत मिट्टी गिराकर छोड़ दिया गया है। गत हुई बारिश से मिट्टी धंसकर नीचे बैठ गई है। इससे रास्ते पर फिर से गड्ढा बन गया है। जिससे राहगीरों को दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

कोट

पाइपलाइन बिछाने और ट्रायल समाप्त होने के बाद कार्यदायी संस्थाओं को सड़क का मरम्मत कराना है। जिस स्थिति में सड़क की खुदाई हुई थी। ठीक उसी स्थिति में करके देना है। इसके लिए बजट भी मिलता है। जहां काम समाप्त होने के बाद भी रास्तों की मरम्मत नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर मरम्मत कराया जा रहा है। - रामेश्वर दयाल, अधिशासी अभियंता जल निगम, मऊ
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