मऊ। महिला को मारने पीटने और गाली देने के मामले में आरोपी तत्कालीन शहर कोतवाल व वर्तमान में डीजीपी कार्यालय में उपाधीक्षक राजीव प्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने व्यक्तिगत मुचलके पर जमानत दे दी। आरोपी की ओर से अदालत में गैर जमानती वारंट को निरस्त करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। इसे सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी ने व्यक्तिगत मुचलके पर गैर जमानती वारंट निरस्त कर दिया। सीजेएम ने अपने आदेश में लिखा कि आरोपी तय तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा। कोई ऐसा काम नहीं करेगा, जिससे पत्रावली के निस्तारण में विलंब हो। मामला 11 दिसंबर 2013 में सरायलखसी थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार, सुशीला सिंह ने सीजेएम कोर्ट में तत्कालीन शहर कोतवाल राजीव प्रताप सिंह के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया। आरोप है कि कोतवाल राजीव प्रताप सिंह ने उसे सरायलखंसी थाने में मारापीटा तथा गाली दी। सीजेएम ने राजीव प्रताप सिंह को मारपीट व गाली देने के मामले में तलब किया था।
राजीव प्रताप सिंह कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे। उनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट के साथ ही कुर्की के लिए का नोटिस जारी किया गया था। वह बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। इस दौरान उनकी ओर से गैर जमानतीय वारंट को निरस्त किए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। सुनवाई के बाद सीजेएम ने 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलिका और अंडर टेकिंग दाखिल करने पर गैर जमानतीय वारंट निरस्त कर दिया।