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कोविड-19 के दौरान दर्ज हुए फौजदारी मुकदमे होगे वापस, शासनादेश जारी

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मऊ। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी धर्मेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद की तरफ से विनय कुमार व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में पारित आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने जनहित को देखते हुए कोविड-19 के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने के लिए शासनादेश जारी किया है। इसके तहत महामारी के दौरान दर्ज हुए उन सभी मुकदमों जिसमें अधिकतम दो वर्ष की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है, उन्हे वापस लिया जाएगा। लेकिन वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद, विधान परिषद सदस्यों के मामलों को छोड़कर जिन मामलों में आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया जा चुका है। ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए लोक अभियोजक न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करेंगे। बताया कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और प्रदेश सरकार ने जारी पत्र में सामान्य नागरिकों को अनावश्यक अदालत की कार्रवाई से बचाया जा सके । इसके लिए प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया है। महामारी के दौरान कायम मामले में आरोपी बना व्यक्ति अगर अपने मामले में जानकारी चाहता है तो वह अभियोजन कार्यालय में संपर्क कर सकता है। अभियोजन अधिकारी सुभाष, सहायक अभियोजन अधिकारी रविंद्र विक्रम, सहायक अभियोजन अधिकारी रविंद्र प्रताप यादव, सहायक अभियोजन अधिकारी केशरी नंदन और सहायक अभियोजन अधिकारी विमलेश पांडेय से जानकारी प्राप्त कर सकता है। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी श्री त्रिपाठी ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर मुकदमा दर्ज किया। जिसे सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश पर जनहित को देखते हुए वापस लेने का आदेश जारी किया है।
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