पकड़े गए आरोपी ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं।
ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह की हत्या के मामले में गवाह रहे रामसिंह मौर्या व सिपाही सतीश की हत्या के मामले की सुनवाई शुक्रवार को अपर जिला जज कोर्ट नंबर चार डॉ. अजय कुमार की अदालत में हुई।
इस दौरान अभियोजन की ओर से तीन गवाह राजेश सिंह, रणजीत व पियूष सिंह को पेश किया गया। तीनों गवाह विवेचन को दिए गए अपने पूर्व के बयान से कोर्ट में मुकर गए। जिस पर एडीजीसी शिवदत्त यादव ने तीनों को पक्षद्रोही घोषित करते हुए उनसे जिरह की। इसके बाद आरोपियों के अधिवक्ता ने भी उनसे जिरह किया। जिरह पूरी हो जाने के बाद एडीजे ने मामले में सुनवाई के लिए 13 अप्रैल 2016 की तिथि नियत किया।
इस दौरान कोर्ट में सदर विधायक मुख्तार अंसारी को पेश नहीं किया जा सका। लेकिन आरोपियों की पेशी व गवाहों की सुरक्षा को देखते हुए कचहरी परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। मामला दक्षिणटोला थाना क्षेत्र का है।
तत्कालीन एआरटीओ कार्यालय के पास 19 मार्च 2010 को रामसिंह मौर्या व सुरक्षा में लगा सिपाही सतीश की गोलीमार कर हत्या कर दी गई। अशोक सिंह की तहरीर पर सदर विधायक मुख्तार अंसारी सहित पांच नामजद व कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्घ रिपोर्ट दर्ज हुई।
पुलिस ने मामले की विवेचना कर 11 लोगों के विरुद्घ आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया है। मामले में साक्ष्य की कार्यवाही चल रही है। शुक्रवार को गवाह पियूष सिंह, राजेश सिंह व रणजीत का बयान कोर्ट में हुआ। तीनों ने विवेचक को जो बयान दिया था उससे पलट गए। जिसपर उन्हें पक्षद्रोही घोषत कर एडीजीसी शिवदत्त यादव व आरोपियों के अधिवक्ता ने जीरह किया। मामले में अब तक लगभग आठ गवाहों की गवाही हो चुकी है जिसमें चार गवाह पक्षद्रोही हो चुके है।