टक्कर इतनी जोरदार थी कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समीर दत्ता सड़क से करीब 25 फुट नीचे जा गिरे।
कुख्यात बदमाश धर्मेंद्र सिंह के बाद पुलिस की नजर उसके गुर्गों पर है। जिससे उसका आपराधिक नेटवर्क ध्वस्त हो जाए। इसमें जनपद ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के कई जनपदों की पुलिस लगी हुई है।
आजमगढ़ जनपद के तरवां थाना क्षेत्र के खुटहन का निवासी धर्मेंद्र सिंह इन दिनों मऊ जनपद के लिए आतंक का दूसरा नाम बन गया था।
उसके विरुद्ध विभिन्न जनपदों में 38 हत्या, लूट आदि के मुकदमे दर्ज हुए थे। जिले में 15 से अधिक ग्राम प्रधान, व्यापारी एवं चिकित्सकों से उसने दस लाख से लेकर 5 लाख की रंगदारी मांगी थी। उसके डी-नाईन गैंग ने अपना नेटवर्क आजमगढ़, मऊ, गोरखपुर आदि क्षेत्रों में फैला रखा था।
अपने गुर्गों के माध्यम से वह इन दिनों अकूत संपत्ति का मालिक बनने के लिए सभी जिलों में धनाढ्य लोगों से रंगदारी मांग रहा था। रंगदारी के ही मामले में चिरैयाकोट निवासी विनोद सेठ की 22 मार्च को एके 47 से भुनकर हत्या कर दी गई। इसके बाद उसके साथियों ने बढ़ुआ गोदाम निवासी घूरा गुप्ता को भी रंगदारी न देने पर निशाना बनाया।
दोनों व्यापारियों की हत्या के बाद तो जनपद ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के जिलों में उसके नाम की तूती बोलने लगी। यही कारण था कि वह हर जिले में डाक्टर, व्यापारियों से रंगदारी मांग रहा था। रंगदारी की लालच में ही वह आखिरकार गुरुवार को एसटीएफ के हाथों मारा गया। हालांकि इसमें कई जनपदों की पुलिस भी लगी हुई थी।
डी-9 गैंग के सरगना के मारे जाने के बाद पुलिस की नजर उसके गुर्गों पर है। जो रंगदारी की रकम वसूल करते थे और ना देने पर ताबड़तोड़ हत्या कर रहे थे।