गोरखपुर में गुरुवार को एसटीएफ के एनकाउंटर में दो लाख के इनामी बदमाश धर्मेंद्र सिंह के मरते ही जिले के व्यापारियों से लेकर आम लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई स्थानों पर तो व्यापारियों ने मिठाई तक बांट डाली और पटाखे भी छोड़े गए।
वहीं पुलिस ने भी राहत की सांस ली। धर्मेंद्र सिंह काफी दिनों से मऊ ही नहीं बल्कि पूर्वांचल की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। आजमगढ़ के तरवां थाना क्षेत्र का रहने वाला धमेंद्र सिंह नवागत पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना के जनपद में आने के बाद उसने खुले रूप से पुलिस को चुनौती देकर घटनाओं को अंजाम देने में लगा था।
चिरैयाकोट में 22 मार्च को विनोद सेठ को एके 47 से दिनदहाड़े हत्या करने के बाद वह जिले में आतंक का पर्याय बन चुका था। यही नहीं उसने जिले के कई बड़े व्यापारियों सहित चिकित्सकों आदि से रंगदारी मांग रखी थी।
11 मई को बढ़ुआ गोदाम में दवा व्यापारी घूरा गुप्ता की हत्या के बाद धर्मेंद्र सिंह को एसटीएफ सहित कई जनपदों की क्राइम ब्रांच ढूंढ रही थी। इधर कुछ दिनों से धर्मेंद्र का लोकेशन बिहार में मिल रहा था। एसटीएफ और मऊ जनपद की स्वाट टीम सहित पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना लगातार उस पर और उसके साथियों पर नजर रखे हुए थे।
गुरुवार को उसके गोरखपुर जनपद में मारे जाने की सूचना मिलते ही पुलिस ने न सिर्फ राहत की सांस ली बल्कि यहां के व्यापारियों, चिकित्सकों ने भी खुशी का इजहार किया।