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सचिव की जांच में मिली अनियमितता, बीडीओ ने जताई अनभिज्ञता

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बढुआगोदाम। परदहा ब्लाक के नसीरपुर गांव के ग्राम प्रधान पर सरकारी रकम के गबन का आरोप की शिकायत के बाद ब्लाक के बीडीओ तथा ग्राम विकास अधिकारी में मतभेद दिख रहा है। जहां जांच में ग्राम विकास अधिकारी ने शिकायत का सही पाया तो वहीं बीडीओ ने इस मामले में जांच की अनभिज्ञता जताते हुए संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को किसी तरह का जांच सौंपने की बात से इंकार किया है। ग्राम विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार को शिकायकर्ता नसीरपुर गांव निवासी प्रमोद कुमार यादव द्वारा ग्राम प्रधान पर शासकीय योजना में धांधली कर शासकीय राशि गबन का आरोप लगाया गया था। बुधवार को जांच में ग्राम प्रधान द्वारा बेसलाइन सर्वे में पात्रों के बजाए अपात्रों को चिह्नित किया पाया गया। बताया कि ग्राम प्रधान द्वारा गांव के रमपति यादव, रणजीत, जवाहर लाल यादव बेसलाइन सूची में न होने के बाद भी इनके खाते में राशि भेजी गई। यहीं 21 लाभार्थियों का चेक तीन अलग अलग फर्म के नाम पर काटा गया हैं। वहीं गांव के एक लाभार्थी हरीनाथ राम को दो बार शौचालय का निर्माण दिखाते हुए दो बार 12 हजार रुपये भेज दिया गया है। इसके अलावा गांव के पोसन के मकान से सुग्रीव पाल तक राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत इंटरलॉकिंग कार्य बिना पूरा कराए ही 4 लाख 47 हजार का भुगतान किया जाना पाया गया। उधर बीडीओ छोटेलाल तिवारी का कहना है कि गांव की जांच एडीओ समाज कल्याण अनिल कुमार को सौंपा है। राघवेंद्र सिंह को जांच आख्या कार्यालय को सौंपने की बात मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर राघवेंद्र ने कोई जांच रिपोर्ट सौंपी है तो यह उनके मनमाने रवैया का प्रतीक है। ग्राम विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह का दावा है कि कनिष्ठ लिपिक एकता श्रीवास्तव द्वारा एक मार्च 2019 को जनशिकायत निवारण प्रणाली द्वारा शिकायतकर्ता की शिकायत जांच के लिए मुझे रिसीव कराई गई थी। वहीं ग्राम प्रधान वीरेंद्र यादव ने बताया कि उन्हें फंसाया जा रहा है। जो भी जांच रिपोर्ट भेजी गई है वे सरासर गलत है।
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