अब गुमशुदा, बेसहारा बच्चों को गैर जनपद नहीं जाना पड़ेगा। बेसहारा तथा भूले-भटके बच्चों को आश्रय दिलाने के लिए जल्द ही जिले में चाइल्ड लाइन सेंटर स्थापित किया जाएगा। शासन ने इसकी सहमति दे दी है। सहयोगी के तौर पर दो संस्थाओं का चयन भी हो चुका है। संबंधित विभाग की तरफ से भौतिक स्थिति का सत्यापन करने के लिए शासन से गाइड लाइन मांगी गई है।
जिले में बच्चों की निगरानी और सही देखभाल करने को लेकर शासन की तरफ से कवायद तेज हो गई है। अभी तक जिले में कहीं भी कोई गुमशुदा या बेसहारा बच्चा मिलने पर पुलिस उन्हें अपनी अभिरक्षा में लेती है और फिर निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बिना ही गैर जनपद की चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया जाता है। अब चाइल्ड लाइन की स्थाई यूनिट होने से गुमशुदा और बेसहारा बच्चों को त्वरित सहयोग तो मिलेगा ही उन्हें उचित ठिकाना भी मुहैया कराया जाएगा। शासन के निर्देश के बाद दिल्ली की आई टीम ने जिले में सर्वे कर दो संस्थाओं का चयन चाइल्ड लाइन की सहयोगी के तौर पर किया है। खुला आश्रय गृह का सहयोग सामान्य रुप से हर तरह के बच्चों के लिए होगा, जबकि दूसरा रेलवे चाइल्ड का संचालन होगा। विभाग की तरफ से दोनों संस्थाओं की तय मानकों के आधार पर भौतिक स्थिति का सत्यापन करने के लिए शासन से गाइडलाइन मांगी है। जिससे बाद में कोई गतिरोध की नौबत न आए।
कोट
गुमशुदा, बेसहारा बच्चों के लिए चाइल्ड लाइन का सेंटर बनाया जाएगा। दो संस्थाओं का चयन किया गया है। भौतिक सत्यापन के लिए शासन से गाइड लाइन मांगी गई है। समरबहादुर सरोज, जिला प्रोबेशन अधिकारी