मधुबन। थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं सहित विभिन्न घटनाओं में हो रही मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। देखा जाए तो मई से अब तक लगभग 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जो औसतन तीन दिन में एक का आंकड़ा है। जनवरी से अब तक देखा जाए तो यही आंकड़ा और भी ज्यादा चौकाने वाला है। इसमें सबसे अधिक मौतें तेज गति से वाहन चलाने से हुई हैं। हेलमेट नहीं लगाने से लगभग छह लोगों की मौत हुई है जो अब तक कि कम समय में सर्वाधिक मौतें है। मधुबन थाना क्षेत्र में दुर्घटनाओं में मौतों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। औसतन तीन से चार दिन में एक मौत का आंकड़ा है। गत सोमवार को हुई तिनहरी में सड़क दुर्घटना में एक लड़के की मौत हो गई जबकि दूसरा बुरी तरह घायल हो गया। इसी सड़क पर पांच दिन पहले 13 जून को मधुबन से मऊ जा रहे सूरजभान और जीऊत साहनी की चचाईपार के पास सड़क दुर्घटना में ही मौत हो गई थी। किसी ने हेलमेट नहीं पहन रखा था। मौत के इन आंकड़ों पर गौर करे तो गत 10 मई को चचाईपार के पास मखमेलपुर में शैलेंद्र की पेड़ पर लटकती लाश मिली थी।12 मई को आलापुर के पास टेंपो के पलटने से पतीला निवासी संतोष की मौत हुई थी।16 मई को नंदौर गनिवासी चन्नर की कचिया शराब पीने से मौत हुई थी। 20 अप्रैल को मिश्रौली निवासी राम मिलन और पिंकी चौहान का शव पेड़ से लटका मिला था। 01 जून को कस्बे में ही रात को बिजली के करेंट की चपेट में आने से बीस वर्षीय सौरभ की मौत हो गई थी। नौ जून को लोकीपुर में डेढ़ वर्षीय शिवानी की क्षत विक्षत लाश मिली थी तो 11 जून को बहरीपुर में टुल्लू पम्प में उतरे करेंट की चपेट में आने से रामविलास की मौत हो गई थी। आठ मई को ढ़ढवल पटरांव के पास बालू लदी ट्रैक्टर ट्राली पलटने से रामपुकार की मौत हो गई थी। 11 अप्रैल को करौंदी निवासी शिक्षक दुर्गविजय यादव की सड़क दुर्घटना में ही बौला पुल के पास मौत हो गई थी।
एसडीएम निरंकार सिंह का कहना है कि हेलमेट लगाने के लिए सरकार तथा प्रशासन के तरफ से लोगों को जागरुक किया जाता है, लेकिन लोग लापरवाही में जान जोखिम में डालते हैं।