मधुबन थाना क्षेत्र के लखनौर में वुधवार को राम जानकी लक्ष्मण की मूर्तियों की चोरी को लेकर ग्रामीणों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। मंदिर के पुजारी राजेन्द्र पाण्डेय राम जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियों को अष्टधातु की होने का दावा करते रहे जबकि गांव के किसी भी आदमी ने इन मूर्तियों को अष्टधातु की होने की पुष्टि नहीं किया।पुलिस ने इन मूर्तियों को अष्टधातु की नहीं होने के दावे करती रही। गांव के सबसे वृद्ध 92 वर्षीय व्यक्ति कल्पनाथ पाण्डेय का कहना था कि मन्दिर में स्थापित मूर्तियां सन् 1956 में खंडित हो गयी थीं। मन्दिर में खंडित मूर्तियों की पूजा को अशुभ मानते हुए लगभग चार वर्षों तक ग्रामीणों ने पूजा अर्चना करना छोड दिया था।विद्वान ब्राहम्णों ने भी मन्दिर में खंडित मूर्तियों को रखना अशुभ बताया। इसके बाद ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर 1960 में राम जानकी लक्ष्मण और हनुमान जी का पीतल की मूर्तियों को स्थापित कराया और तब जाकर मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हुई।55 वर्षीय ग्राम प्रधान कृष्ण प्रताप मल्ल और 50 वर्षीय जयनाथ यादव ने बताया कि अष्टधातु की मूर्तियों की चोरी की बात ग्रामीणों के गले नही उतर रहा जबकि चोरी गयी मूर्तिया ग्रामीणों के द्वारा पीतल की स्थापित कराई गयी थी।साथ ही 35 वर्षीय गुड्डू पाण्डेय तथा 42 वर्षीय रवि तिवारी का कहना था कि लगभग 10 वर्ष पूर्व तत्कालीन थानाध्यक्ष विजय शंकर यादव ने क्षेत्र में मन्दिरों की जांच कराई थी लेकिन उस समय भी थाना क्षेत्र में किसी भी मंदिर में अष्टधातु की मूर्तियों की स्थापना की पुष्टि नहीं हुई थी। स्थानीय थाने के रिकार्ड में भी अध्ष्टधातु की मूर्तियों वाले किसी मंदिर का उल्लेख नहीं है। घटना के खुलासे के लिए मुकामी पुलिस और एसओजी जांच में जुटी हुई है। प्रभारी निरीक्षक ने मामले का खुलासा शीघ्र करने का दावा किया। इस बाबत एएसपी एसके
श्रीवास्तव का कहना है कि जल्द ही इस मामले की खुलाद्यद्म कर दिया जाएगा।