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आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या में फोलोअप

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मऊ। सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बढ़ुआ गोदाम गांव निवासी और आरटीआई कार्यकर्ता बालगोविंद सिंह की हत्या में तीसरे दिन भी पुलिस के हाथ खाली रहें। हालांकि शुक्रवार को तीसरे दिन पुलिस बढ़ुआ गोदाम में दुकानों और बैंकों में लगे सीसी टीवी कैमरे को खंगालने में जुटी रही। सूत्रों की मानें तो नामजद आरोपियों की तलाश में छापेमारी करने के साथ-साथ पुलिस की जांच अब डी-9 गैंग के साथ लिख कर फाड़ी गई तहरीर में नामजद किए गए लोगों के नामों पर केंद्रीत को हो गई है।
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बीते बुधवार की सुबह बदमाशों ने आरटीआई कार्यकर्ता और बढ़ुआ गोदाम गांव निवासी बाल गोविंद की गोली मारकर हत्या किया था। इस मामले में मृतक की पत्नी शीला ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें गांव के प्रधानपति शैलेंद्र यादव के साथ उसके भाई गुड्डू यादव के साथ लालू यादव को नामजद तथा छह अज्ञात लोगों को आरोपित किए गए। सूत्रों की मानें तो घटना में पहले सीओ नगर के नाम को कुछ लोगों ने घसीटा, बाद में पीछे हट गए। इसके अलावा तहरीर में कुछ और नामों को भी शामिल किया गया था, लेकिन बाद में तहरीर को फाड़ दिया गया। पुलिस जांच कर रही है कि तहरीर में पीड़ित परिवार ने किस बिनाह पर नाम को डाला और बाद में क्यों उस प्रार्थना पत्र को फाड़ दिया गया। इसके अलावा मृत आरटीआई कार्यकर्ता के दबाव पर एक व्यक्ति ने थाने में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें नामजद व्यक्ति बढुआ गोदाम गांव का निवासी है। शैलेंद्र यादव से बाल गोविंद की पुरानी रंजिश चलती थी, बाल गोविंद के चलते प्रधान पति को जेल भी जाना पड़ा था, जबकि नामजद लालू यादव डी-9 गैंग का सक्रिय सदस्य है। दवा व्यापारी घुरा गुप्ता की हत्या में शैलेंद्र यादव आरोपी बनकर जेल में रहा। इस मामले की पैरवी बाल गोविंद कर रहे थे, साथ ही मामले में वो गवाह भी थे। इन बिंदुओं पर पुलिस की जांच चल रही है। लेकिन घटना के तीसरे दिन गठित तीन में एक भी टीम के हाथ कोई सबूत नहीं लग सका।
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