मऊ। ताबड़तोड नकली नोट के साथ कारोबारियों के पकड़े जाने और नकली नोट छापाखाना आदि बरामद होने के साथ खुफिया एजियों की, नेपाल के रास्ते नकली नोट आने की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि पूर्वांचल जाली नोटों का हब बनता जा रहा है। लोगों में दहशत है कि यही हाल रहा तो कभी न कभी उनकी गाढ़ी कमाई नकली नोट की जद में आकर लूट न जाए।
बताते चले पांच अक्तूबर 2018 से 05जनवरी 2019 के बीच नकली नोट के तीन मामलों का जिले में खुलासा हो चुका है। इसमें एक छापाखाना भी एटीएस वाराणसी स्थानीय कोतवाली पुलिस की मदद से बरामद कर चुकी है। तीनों मामले का खुलासा होने पर अब तक आठ लोग पकड़े गए है। पांच अक्तूबर की रात कोतवाली क्षेत्र के मलिक ताहिरपुरा मुहल्ले में एटीएस वाराणसी के सहयोग से हुई छापेमारी में मंसूर सहित तीन दबोचे गए थे। मंसूर बकायदा जाली नोट छापने का काम करता था।
उसके पास से दस से सौ रुपये मूल्य के स्टांप के साथ करीब 16 हजार रुपये नकली नोट बरामद हुए थे। इस घटना के 15 दिन बाद सलहाबाद मोड़ से पुलिस ने पांच हजार रुपये नकली नोट के साथ इसी गिरोह के एक सदस्य को दबोचा। इसके बाद पांच जनवरी की रात कोतवाली और स्वाट टीम ने संयुक्तरुप से मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन से सफारी कार सवार चार लोगों को नकली नोट के साथ पकड़ा। इन आरोपियों के पास से चार लाख से अधिक की नकली नोट बरामद हुई। तीन माह के अंदर नकली नोट के साथ जिले में हुई ताबड़तोड़ गिरफ्तारी के अलावा वाराणसी, बलिया और मंडल मुख्यालय आजमगढ़ में भी नकली नोट के सौदागर पकड़े जा चुकें है। इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि पूर्वांचल नकली नोट कारोबार का हब बनता जा रहा है।
पकउ़े गए मंसूर ने बताया था कि वह नेपाल के रास्ते नकली नोट लाकर खपाता था। बाद में नोट बंदी के बाद धंधा बंद हो गया। इस दौरान वह खुद से नई नोट स्कैनर के सहारे छापने लगा। वर्षो से इस क्षेत्र में जाली नोटों का कारोबार जारी है, लेकिन जालसालों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ पाने में पुलिस अबतक कामयाब नहीं हो पाई है। खुफिया विभाग की मानें तो जाली नोटों की खेप बिहार के रास्ते नेपाल से आती है। चूंकि मऊ जनपद रेलमार्ग से बिहार के नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों जिलों से सीधे जुड़ा है। इसलिए भी कारोबारियों की जिले में इंट्री मुश्किल नहीं होती। काफी समय पहले घोसी-कोपागंज और मधुबन थाने की पुलिस ने जाली नोटों के कई कारोबारियों को दबोचा था। इन जालसाजों ने ने भी इस बात की पुष्टि किया था। कारोबारी आधे दाम पर नकली नोटों को बेचते है। भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो केवल कमीशन पर काम करने वाले कैरियर इन नोटों को कारोबारियों तक रेल अथवा सड़क मार्गों से पहुंचा देते हैं। फिर वहां से थोक सप्लायरों द्वारा बेरोजगार युवकों को कमीशन का लालच देकर इस गोरखधंधे में फांस लेते हैं। इस बाबत नवागत पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र बहादुर दावा करते हैं कि वे नकली नोटों के कारोबारियों की कमर तोडकर रहेंगे। यह मेरी अनिवार्य प्राथमिकताओं में में एक है।