अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने नाबालिग को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुराचार करने के मामले में आरोपित को सुनवाई के बाद दोषी पाया। कोर्ट ने आरोपी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही बीस हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया।
मामला कोतवाली मुहम्दाबाद गोहना क्षेत्र का है। वादिनी मुकदमा की बेटी की शादी इजहार पुत्र हाफिज इरशाद निवासी पूरा सैफी कस्बा और थाना मुबारकपुर जनपद आजमगढ़ के साथ हुई थी। इजहार अपनी पत्नी को हमेशा मारता पीटता और धमकी देता था। 19 जून 2010 की रात इजहार वादिनी के घर आया। 20 जून 2016 की भोर में उसकी छोटी बंटी उम्र 16 वर्ष को बहला फुसलाकर भगा ले गया। साथ ही उसके संग दुराचार किया । पुलिस ने वादिनी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी करते हुए एडीजीसी श्रीप्रकाश यादव ने कोर्ट में वादिनी सहित कुल सात गवाहों को पेशकर अपने पक्ष को रखा। जबकि बचाव पक्ष की तरफ से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी इजहार को अपहरण व दुराचार का दोषी पाया।
अदालत ने इजहार को धारा 363 भादवि के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास के साथ ही तीन हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न अदा करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 366 भादवि के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास के साथ ही पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न अदा करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही दुराचार के मामले में दस वर्ष का कठोर कारावास के साथ बीस हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपी की तरफ से जमा किए गए अर्थदंड में से कोर्ट ने 15 हजार रुपया पीड़िता को देने का आदेश दिया। साथ ही एडीजे ने आदेश दिया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पीड़िता को क्षतिपूर्ति दी जाए।