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Mau News: चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल की दीवारों में दरारें, राज बर्बाद हो रहा हजारों लीटर पानी

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मऊ/ कुसुम्हा। देख-रेख व मरम्मत के अभाव में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल की दीवारें जगह-जगह फट चुकी है। पानी छोड़े जाने पर रिसाव होने से रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। जबकि हर साल मरम्मत और सफाई के लिए 23 से 30 लाख रुपये का बजट सिंचाई विभाग को मिलता है। नहर की स्थिति ये है कि अंदर काई की मोटी परत जम गई है। झाड़ियां उग आई हैं। वर्ष 1952 (प्रथम पंचवर्षीय योजना) में दोहरीघाट में सरयू नदी पर चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल का निर्माण हुआ। बलिया के मालीपुर तक इसकी लंबाई 60 किलोमीटर है। 35.600 किलोमीटर भाग मऊ जिले में है। प्रथम पंचवर्षीय योजना में बनी ये नहर एशिया की ऐसी पहली नहर थी। सरयू नदी से 12 मोटर पंप के जरिए इसमें पानी छोड़ा जाता है। कई दशकों तक ये नहर दोनों जिलों के किसानों का सहारा बनी रही। मऊ से बलिया जिले तक लाखों हेक्टेयर जमीन को पानी देने वाली नहर से चार रजवाहे और 40 माइनर निकली हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखरेख के अभाव में नहर में मोटी सिल्ट (गाद) जमा हो गई है। जगह-जगह से दीवारों में दरारें आ गई हैं। किसानों का आरोप है कि कभी सफाई के नाम तो कभी दूसरे कारणों से पानी अक्सर बंद रहता है। लेकिन जब भी नहर चालू होती है फटी दीवारों से रिसाव के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। इसके चलते हर साल सैकड़ों एकड़ फसल सूख जाती है।
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कोट

नहर की मरम्मत बहुत पहले हुई थी। नहर के नवीनीकरण के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। संभवत: लोकसभा चुनाव के बाद बजट स्वीकृत हो जाएगा। जिसके बाद नहर को नए सिरे से मरम्मत और सफाई कराई जाएगी।
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- मनोज सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई मऊ
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